विवि प्रशासन बीएड में एडमिशन के लिए दोनों छात्रों को एक-दूसरे के पास दौड़ा-दौड़ा कर मानसिक और शारीरिक रूप से कर रहे हैं परेशान
लखनऊ 25 सितम्बर। BBAU के प्रशासन ने न्यायालय के आदेश को भी ताक पर रख दिया। जिसमे 19 सितम्बर को उच्च न्यायालय ने स्पस्ट निर्देश जारी कर विवि प्रशासन को छात्रों का प्रवेश तुरंत लेने का आदेश दिया था। लेकिन विवि प्रशासन ने उक्त छात्रों में से सिर्फ एक बसन्त कुमार कनौजिया का ही एडमिशन एम फिल में लिया जबकि जयवीर और अश्वनी रंजन का एडमिशन बीएड विभाग में नहीं लिया। दोनों छात्रों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की प्रतिलिपि कुलपति और विभाग में प्रेषित करने के बाद भी बीएड विभागाध्यक्ष दोनों का एडमिशन लेने से इंकार कर रहा है।
प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार दोनों छात्रों को विवि प्रशासन बीएड में एडमिशन के लिए एक -दूसरे के पास दौड़ा-दौड़ा कर मानसिक और शारीरिक रूप से परेशांन कर रहे हैं। विभगाध्यक्ष कहते हैं कि उनको विवि प्रशासन और कोर्ट से एडमिशन देने का कोई आदेश प्राप्त नही हुआ है। उधर विवि प्रशासन कह रहा है कि एडमिशन का आदेश जारी कर दिया गया है। लेकिन बीएड विभागाध्यक्ष की बातों से लग रहा है कि उनके लिए उच्च न्यायालय का आदेश भी विवि प्रशासन के आगे कुछ नही है। विभाग और विवि प्रशासन के इस भेदभाव पूर्ण रवैये के कारण उक्त छात्र अवसाद में है और अपने आप को हीनभावना से ग्रसित महसूस कर रहे है।
उच्च न्यायालय के आदेश पर विवि प्रशासन ने आदेश जारी कर बसन्त कनौजिया का प्रवेश तो ले लिया गया। लेकिन बीएड विभाग द्वारा अश्वनी और जयवीर का क्यों नही प्रवेश लिया जा रहा है। यह यक्ष प्रश्न है। जिस पर विवि प्रशासन को जवाब देना बाकी है।







