UPPCL का कारनामा, उपभोक्ताओं के संयोजन जोडने व काटने की फीस में की 3 गुना वृद्धि

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  • पावर कारपोरेशन का गुपचुप कारनामा, उपभोक्ताओं के संयोजन जोडने व काटने की फीस में 3 गुना से ज्यादा की वृद्धि किया आयोग में प्रस्तावित, रू0 150 की जगह रू0 500 इसी प्रकार अन्य दरों में में भी किया कई गुना वृद्धि का प्रस्ताव
  • उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन को लिया आडे हाथों कहा टैरिफ प्रक्रिया के अंतिम समय में पावर कारपोरेशन नही दे सकता कोई भी अन्य वृद्धि प्रस्ताव
  • उपभोक्ता परिषद का विधिक मत कहा जिन मानकों को आयेाग ने स्वीकार कर उसे कराया सार्वजनिक अब उन्हीं तथ्यों पर हो सकती है केवल सुनवाई
  • उपभोक्ता परिषद नियामक आयोग अध्यक्ष से कल करेगा इस मुददे पर बैठक
लखनऊ 10 अक्टूबर। प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा जहाॅं ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 350 प्रतिशत की वृद्धि किसानों की दरों में 80 प्रतिशत व शहरी घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि आयेाग में प्रस्तावित की थी और सुनवाई चल रही है और अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को लखनऊ में होनी है। इसी बीच पावर कारपोरेशन ने गुपचुप तरीके से नियामक आयेाग में एक प्रस्ताव यह दाखिल कर दिया गया कि प्रदेश के विद्युत उपभेाक्ताओं के संयोजन जोडने व काटने की दरों में कई गुना वृद्धि जरूरी है अभी तक आम विद्युत उपभोक्ताओं से जो वर्तमान में 150 रू0 वसूला जाता है उसे अब रू0 500 प्रस्तावित कर दिया गया और साथ ही उसमें यह भी जोड दिया गया कि यदि उपभोक्ता का कनेक्शन 1 बार के बाद कभी पुनः कटता है और जोडा जायेगा तो उसमें हर बार अतिरिक्त रू0 250 और जोड दिया जायेगा। यदि 3 बार ऐसी स्थिति आयी तो यह फीस स्वतः रू0 1000 हो जायेगी। इसी प्रकार 100 बीएचपी व 75 किलोवाट के ऊपर विद्युत उपभोक्ताओं की जो फीस अभी तक रू0 500 थी उसे रू0 1000 प्रस्तावित कर दिय गया और उसी प्रकार 100 बीएचपी और 75 किलोवाट के नीचे जो फीस रू0 275 थी उसे रू0 500 प्रस्तावित कर दिय गया जो पूरी तरह नियम विरूद्ध है और टैरिफ के अंतिम समय में दिया गया यह प्रस्ताव विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के पूरी तरह विरूद्ध भी है।
उप्र राज्य विद्युत उपभेाक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि वर्तमान मंे जब वर्ष 2017-18 का टैरिफ स्वीकार होने के बाद सुनवाई के अंतिम दौर में है उसमें अतिरिक्त कोई भी प्रस्ताव दिया जाना असंवैधानिक है। पावर कारपोरेशन को यह ज्ञान होना चाहिये कि आये दिन टैरिफ के रेट शेडयूल में कोई बदलाव नही होता अब सुनवाई केवल उन्हीं बिन्दुओं पर हो सकती है जो समाचार पत्रों में आयोग आदेशानुसार प्रकाशित हो चुका है। वैसे भी प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅं बिना  विद्युत उपभोक्ताओं के कनेक्शन को काटे ही उसे कटा मानकर उपभोक्ताओं के अगले बिल में शुल्क वसूल लेती हैं। जो अपन आप में असंवैधानिक है। ऐसे में अब नियम विरूद्ध वृद्धि प्रस्तावित किये जाने से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅं पूरी तरीके से प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की जेबों पर डाका डालने पर अमादा हैं।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि आज नियामक आयोग अध्यक्ष शहर से बाहर थे कल उनसे मुलाकात कर इस पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की जायेगी और इस असंवैधानिक प्रस्ताव को खारिज करने हेतु जनहित प्रत्यावेदन दाखिल किया जायेगां

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