बिजली दर की सुनवाई में उपभोक्ताओं ने UPPCL को लिया आड़े हाथों

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  • उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष के सवालों के सामने बिजली कम्पनियों की बोलती बंद
  • उपभोक्ता परिषद ने उठायी मांग मुख्यमंत्री जी को गुमराह कर पावर कारपोरेशन प्रबन्धन ने ग्रामीण व किसानों की बिजली दरों में कराली व्यापक बढोत्तरी की हरी झण्डी, उच्चस्तरीय जांच की मांग
  • उपभोक्ता परिषद का बडा खुलासा कहा यह सरकार की कैसी नीति उप्र में नया हवाई अडडा बनाओं तो रू0 4 प्रति यूनिट की मिलेगी छूट और प्रदेश के किसनों व ग्रामीणों की दरों का प्रस्ताव रू0 5 से रू0 6 प्रति यूनिट जो अन्नदाता का बडा अपमान
लखनऊ 12 अक्टूबर। प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा प्रदेश के विभिन्न श्रेणी के विद्युत उपभोक्तााओं की दरों में व्यापक वृद्धि प्रस्ताव  पर आज उप्र विद्युत नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल की अध्यक्षता में किसान मण्डी भवन सभागार में प्रातः 11 बजे से सार्वजनिक सुनवाई सम्पन्न हुयी जिसमें बडी सॅंख्या में विद्युत उपभोक्ताओं ने भाग लेकर प्रदेश की बिजली कम्पनियों की अक्षमता का खामियाजा प्रदेश की जनता पर न डालने की गुहार लगायी और अपना गुस्सा जमकर बिजली कम्पनियों पर निकाला। पावर कारपोरेशन की तरफ से निदेशक वाणिज्य श्री संजय सिंह, मध्याॅंचल एम डी श्री ए पी सिंह सहित दर्जनों अभियन्ता चुपचाप आम जनता की आवाज सुनते रहे।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने एक बडा खुलासा करते हुए कहा कि बिजली दर बढोत्तरी के पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के सामने पावर कारपोरेशन के उच्चाधिकारियों द्वारा जो सलाईड दिखायी गयी थी वह अधूरी थी यह बात पावर कारपोरेशन के एक उच्चाधिकारी द्वारा आयोग के एक उच्चाधिकारी के सामने कही गयी और वहाॅं मै खुद मौजूद था यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री जी पूरी सलाईड नही देख पाये हम लोग चले आयेे और उसके बाद ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में व्यापक बढोत्तरी का प्रस्ताव दे दिया जो अपने आप में गंभीर मामला है। इससे ऐसा सिद्ध होता है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री महोदय को पावर कारपोरेशन के उच्चाधिकारियों द्वारा गुमराह कर इतनी बडी टैरिफ बढोत्तरी आयोग को भेज दी गयी। उपभोक्ता परिषद मुख्यमंत्री जी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जाॅंच कराने की मांग उठायी। उपभेाक्ता परिषद अध्यक्ष ने आज जिन बिन्दुओं पर बडा खुलासा किया उसके साक्ष्य सहित लिखित आपत्तियाॅं व सुझाव आयोग अध्यक्ष को सौंप भी दिये।
 प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से सर्वप्रथम उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश की बिजली कम्पनियों और पावर कारपोरेशन को आडे हाथों लेते हुए कहा कि बिजली कम्पनियों का जो घाटा सन 2001 में 77 करोड था अब वह 75 हजार करोड से ज्यादा हो गया जिसके लिये प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅं जिम्मेदार है। प्रदेश की बिजली कम्पनियेां द्वारा सबसे ज्यादा वृद्धि गाॅंव की जनता के घरों की 350 प्रतिशत तक प्रस्तावित की गयी है। जबकि सरकार द्वारा ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिये 3760 करोड की सब्सिडी घोषित की गयी है।
 प्रदेश के 84 लाख ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं पर प्रति माह लगभग 373 रू. सब्सिडी का अंश आता है यदि 180 रू. प्रति किलोवाट उसमें जोड दिया जाये तो यह रू0 553 होता है। रेग्यूलेटरी सरचार्ज व इलेक्ट्रिसिटी डयूटी लगाकर ग्रामीण उपभोक्ता से प्रत्येक माह सब्सिडी सहित कारपोरेशन लगभग 600 रू. वसूल रहा है। इसमें बिजली दर बढोत्तरी का कोई मतलब नही। एवरेज कास्ट आफ सप्लाई रू. 6.97 प्रति यूनिट पर उपभेाक्ता परिषद ने सवाल खडा करते हुए कहा कि रिटर्न आफ इक्यूटी के मद में 17 पैसा व ओएनडम के मद में कम्पनियेां द्वारा जो 78 पैसा प्रति यूनिट जोड गया है वह गलत है यह 40 पैसे से ज्यादा नही होना चाहिये। ऐसे में एवरेज कास्ट आफ सप्लाई स्वतः वर्ष 2016-17 से भी कम आ रही है। ऐसे में बिजली बढोत्तरी का कोई मतलब नही है।
 उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने एक बडा खुलासा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने नागर विमानन नीति 2017 में यह प्राविधानित किया गया है कि नये हवाई अडडा बनाने वालों को रू. 4 प्रति यूनिट बिजली 30 हजार यूनिट तक सस्ती दी जायेगी। यानि की उनकी दरें केवल 3 रू. प्रति युनिट के करीब होगी। यह कैसा दुर्भाग्य है कि प्रदेश के किसान अन्नदाता/ग्रामीण उपभोक्ता की बिजली दरें रू. 5 से रू0 6 प्रति यूनिट के बीच और हाई प्रोफाईल हवाई अडडा बनाने वालों की 3 रू.। उपभोक्ता परिषद ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के घोषण पत्र में गरीब उपभोक्ताओं को रू0.3 प्रति यूनिट में बिजली लेने वाला उपभोक्ता क्या नया हवाई अडडा वाला उपभोक्ता है? यह देश का दुर्भाग्य है कि किसान और गाॅंव की जनता मंहगाई से मर रही है और प्रदेश की सरकार हवाई अडडा लगाने वालो को सस्ती बिजली की बात कर रही है और प्रमुख सचिव ऊर्जा द्वारा भी उसी क्रम में आगे आदेश भी जारी कर दिये गये और कम्पनियेां को प्रपत्र तैयार करने का निर्देश दिया है।
 उपभोक्ता परिषद द्वारा एचसीएल सिस्टम पर बडा सवाल करते हुए कहा कि रू0 700 से 800 करोड के इस प्रोजेक्ट से जनता को कोई लाभ नही हुआ इस पूरे मामले की सीबीआई जाॅंच करायी जये। पावर कारपोरेशन की ट्रांसफार्मेशन क्षमता पर बडा सवाल खडा करते हुए उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का कुल संयोजित भार लगभग 4 करोड 65 लाख किलोवाट है और प्रदेश की ट्रांसफार्मेशन क्षमता केवल 3 करोड 79 लाख है। ऐसे में बिजली कम्पनियों का सिस्टम कांप रहा है जो सुचारू रूप से बिजली नही दे सकता ऊपर से 25 प्रतिशत बिजली चोरी का लोड है। घटिया मीटर खरीद पर बडा सवाल करते हुए विस्तार से खुलासा करते हुए कहा गया कि घाटे मंे चल रहे विभाग की बिजली कम्पनियों ने लोन के सहारे रू0 548 करोड का मीटर खरीद व लगाने का आर्डर दे दिया और करोडों के मीटर खरीद पाइप लाइन में।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने प्रदेश की बिजली कम्पनियेां पर बडा सवाल करते हुए कहा किसानों के टयूबवेल की दरें जो रू0 160 प्रति बीएचपी प्रति माह है राजस्व बढाने के लिये फलूग्रिड एजेन्सी ने आयोग द्वारा तय टैरिफ में टेम्पर करके 5 किलोवाट के उपभोक्ता पर 400 यूनिट मानकर  उनसे लगभग जो 834 रू0 की जगह रू0 3097 वसूला जा रहा है जो अपने आप में गंभीर मामला है। इसका साक्ष्य भी आयोग को दिया। इसी प्रकार उपभोक्ता परिषद ने बिजली कम्पनियों के लगभग 20 डिवीजनों का नाम गिनाते हुए कहा कि यहाॅं पर लाईन हानियाॅं 25 से 45 प्रतिशत तक है पावर कारपोरेशन क्या कर रहा है?
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने बिजली कम्पनियों को आडे हाथों लेते हुए कहा कि दूसरे राज्यों की तुलना में प्रदेश में ग्रामीण उपभोक्ताओं की दरें कम होने की दुहाई देने वाली प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅं सी ग्रेड में हैं दुर्भाग्य की बात है विगत दिनों देश के 33 डिस्कामों की रेटिंग में प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅं फिसडडी साबित हुयी हैं।
उपभेाक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा पावर फार आल, उदय, आरजीबीबीवाई, टैरिफ प्रस्ताव, बेन्च मार्किंग सभी को मिला दिया जाये तो करोडों का अब तक कंसल्टेन्टों को आर्डर दिया गया है फिर भी बिजली कम्पनियाॅं घाटे में इसकी जांच होनी चाहिये और कंसल्टेन्टों की भूमिका पर भी प्रश्न चिन्ह उठना स्वाभाविक है।
अन्त में उप्र विद्युत नियामक आयेाग के अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल ने यह बात स्वीकार की कि बिजली कम्पनियांे की अक्षमता का खामियाजा उपभोक्ता नही भुगतेंगे उदय में जो 19 प्रतिशत की लाईन हानियाॅं हैं उससे ज्यादा कम्पनियांे को एलाउ नही किया जायेगा और न ही उसका खामियाजा जनता भुगतेगी। नियामक आयोग अध्यक्ष ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा द्वारा किसानों की बिजली दरों में फलूग्रिड बिलिंग एजेन्सी द्वारा मनमाने तरीके से 5 हार्स पावर पर 400 यूनिट का बिल बनाकर कई गुना अधिक वसूली पर जाॅंच कराने का निर्देश दिया और कहा कि इस पूरे मामले में जो भी दोषी होगा बक्शा नही जायेगा सभी की जवाब देही तय होगी क्योंकि टैरिफ को टैम्पर करने का अधिकार किसी को नही है। अन्त में उनके द्वारा कहा गया कि बिजली दरों में बढोत्तरी पर सभी पक्षों को सुन लिया गया है आम जनता के हितों में निर्णय लिया जायेगा।ं

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