आचार संहिता का डर दिखाकर पॉवर कार्पोरेशन कर सकता है बिजली दरों में बढ़ोत्तरी

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  • पावर कार्पोरेशन आयोग पर दबाव डालकर सरकार की छवि धूमिल कराने के लिये प्रकाश पर्व दीपावली के पहले बिजली दरों में नगर निगम चुनाव आचार संहिता का भय दिखाकर कराना चाहता है बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी
  • उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने खोला मोर्चा पूरे मामले को लेकर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकांत शर्मा से की मुलाकात और लम्बी वार्ता
  • प्रदेश के ऊर्जामंत्री श्री श्रीकांत शर्मा का उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को आश्वासन उपभोक्ता हितों का सरकार रखेगी पूरा ख्याल, किसी के दबाव में नहीं होने दी जायेगी नियम विरूद्ध कार्यवाही 
लखनऊ 16 अक्टूबर। उप्र पावर कार्पोरेशन द्वारा नियामक आयोग पर दबाव डालकर नगर निगम चुनाव की आचार संहिता के मद्देनजर दीपावली से पहले या उसके तुरन्त बाद प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में नियम विरूद्ध व्यापक बढ़ोत्तरी कराये जाने की भनक लगते ही उपभोक्ता परिषद ने मोर्चा खोल दिया। दीपावली के पहले नगर निगम चुनाव आचार संहिता की दुहाई देकर उप्र के लगभग 1 करोड़ 85 लाख विद्युत उपभोक्ताओं की दीपावली प्रकाश पर्व जैसे त्योहार पर बिजली दर बढ़ोत्तरी करके त्योहार खराब करने की साजिश का उपभोक्ता परिषद ने किया बड़ा खुलासा, कहा पावर कार्पोरेशन प्रबन्ध सरकार की छवि धूमिल कराने पर आमादा।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने पूरे मामले को लेकर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा से सचिवालय स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात कर लम्बी वार्ता की। लगभग 30 मिनट तक चली द्विपक्षीय वार्ता में उपभोक्ता परिषद की तरफ से प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में ज्यादा बढ़ोत्तरी न करने की जहां पुरजोर मांग उठायी गयी, वहीं उपभोक्ता परिषद ने मंत्री जी के सामने यह मुद्दा उठाया कि 4 सितम्बर, 2017 को आयोग द्वारा बिजली दर प्रस्ताव को स्वीकार किया गया। विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के तहत अधिकतम 120 दिन के अन्दर बिजली दर को जारी करना होता है। ऐसे में आयोग के पास 4 जनवरी, 2018 तक का समय है, लेकिन पावर कार्पोरेशन अनैतिक दबाव डालकर नगर निगम चुनाव आचार संहिता के पहले बिजली दर घोषित कराना चाहता है। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि कुछ उच्चाधिकारी अपने निजी स्वार्थ में उप्र सरकार की छवि धूमिल कराने पर आमादा हैं।
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकांत शर्मा ने वार्ता के दौरान उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया कि कोई भी अधिकारी नियमों के विरूद्ध कोई भी कार्य किसी के दबाव में नहीं कर सकता। सरकार पूरे मामले पर नजर रखे हुए, प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के साथ कोई भी अन्याय नहीं होने पायेगा। इस सरकार में नियमों से हटकर कोई भी कार्यवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। सरकार उपभोक्ताओं के हित का पूरा ख्याल रखेगी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने यह भी मुद्दा उठाया कि 12 अक्टूबर को लखनऊ में सुनवाई के दूसरे दिन 13 अक्टूबर को पावर कार्पोरेशन में उपभोक्ताओं की आपत्तियों को भेजकर उसी दिन जवाब भी ले लिया गया। सबसे बड़ा चैंकाने वाला मामला यह है कि उपभोक्ताओं की आपत्तियों का 5 प्रतिशत सही जवाब भी नहीं लिया गया। जब नियामक आयोग में फुल पीठ 3 सदस्य कार्य करते थे, उस दौरान 3 महीने से कम समय में कभी भी टैरिफ नहीं निकला। ऐसे में वर्तमान में एक सदस्य केवल 1 महीने 15 दिन के अन्दर कैसे बिजली दर घोषित कर सकता है। यह तो केवल विद्युत अधिनियम 2003 का मजाक व औपचारिकता ही साबित होगी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने पूरे मामले पर नियामक आयोग में भी एक विधिक प्रत्यावेदन दाखिल कर अपना विरोध आयोग के सामने प्रकट कर दिया है।

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