ऊर्जामंत्री जी का ट्वीट सरकारी विभागों पर 10 हजार करोड़ का बकाया

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  • उप्र देश का पहला राज्य जहां सरकारी विभागों पर सर्वाधिक बकाया।
  • ऊर्जामंत्री जी का ट्वीट सरकारी विभागों पर 10 हजार करोड़ का बकाया, अपने आप में गम्भीर मामला पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन सरकारी बकाया वसूली हेतु बजटरी प्रोविजन कराकर अपने खाते में जमा कराये बकाया रकम।
  • 75 हजार करोड़ के घाटे में बिजली कम्पनियां सरकारी विभाग के बकायों पर क्यों है मेहरबान?
  • पावर कार्पोरेशन बिजली दर बढ़ोत्तरी कराने हेतु दबाव बनाने के बजाय वसूल कर लें अपना सरकारी बकाया तो नहीं करनी पड़ेगी बिजली दरों में व्यापक वृद्धि।
  • आम जनता के छोटे से बकाये पर कटता है कनेक्शन तो सरकारी विभागों के बकाये पर क्यों नहीं है सख्ती दोहरा मापदण्ड क्यों?
लखनऊः 22 अक्टूबर 2017। प्रदेश की बिजली कम्पनियां जहां लगभग 75 हजार करोड़ के घाटे में हैं, वहीं उप्र के सरकारी विभागों पर लगभग 10 हजार करोड़ का बकाया होना अपने आप में बहुत गम्भीर मामला है वह भी तब, जब पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन आये दिन घाटे का नाम लेकर बिजली दर बढ़वाने के लिये उतावला रहता है। उपभोक्ता परिषद आज यह भी खुलासा कर रहा है कि उदय का अनुबन्ध करने वाले देश के सभी राज्यों में से उप्र राज्य में सरकारी विभागों पर सर्वाधिक बकाया है। प्रदेश के ऊर्जामंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा जी का कुछ घण्टों पहले किया गया ट्वीट ‘‘पूर्व सरकारों में सिर्फ अपना या अपनों केे हितों का ध्यान रखा। घाटा बढ़ता गया, सरकारी विभागों पर ही बिजली विभाग का 10 हजार करोड़ बकाया हुआ‘‘ इस बात की पुष्टि करता है कि उप्र के सरकारी विभाग लम्बे समय से बकाया नहीं जमा कर रहे हैं। ऐसे में पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन को बिजली दर बढ़ोत्तरी का दबाव न बनाकर उप्र सरकार के सामने सभी सरकारी विभागों के बकाये के मद में एक बजटरी प्रोविजन कराकर सभी बकायेदार विभागों से सीधे 10 हजार करोड़ का बकाया पावर कार्पोरेशन के खाते में ले लेना चाहिए, जिससे जहां एक तरफ पावर कार्पोरेशन की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी वहीं दूसरी तरफ बिजली दरों में इजाफा को भी रोका जा सकता है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विगत दिनों उदय की 8वीं मानीटरिंग कमेटी की बैठक में देश में अनेकों राज्यों के सरकारी विभागों के बकाये पर गहन चर्चा हुई तो उसमें यह बात निकलकर सामने आयी थी कि 31 मार्च 2017 तक उप्र में सरकारी विभागों पर बिजली कम्पनियों का लगभग 8853 करोड़ बकाया है। वहीं उप्र से सटे राज्य बिहार में सरकारी विभागों पर बकाया महज 610 करोड़ है। ऐसे में मा. ऊर्जामंत्री द्वारा कुछ घण्टों पहले किये गये ट्वीट से अब पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन को सबक लेकर सरकारी विभागों के बकाये पर अभियान चलाना चाहिए। प्रदेश की आम जनता का हजारों में बकाया होने पर ही उनका कनेक्शन काट दिया जाता है, ऐसे में उप्र के सरकारी विभगों पर हजारों करोड़ का बकाया होना अपने आप में बिजली कम्पनियों की दोहरे माप दण्ड को दर्शाता है। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि बकाया किसी पर भी हो विद्युत अधिनियम-2003 के प्राविधानों के अनुसार सभी पर समान रूप से कार्यवाही होनी चाहिए, चाहे वह छोटा उपभोक्ता हो बड़ा उपभोक्ता हो या सरकारी उपभोक्ता हो।

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