- कम्पनियों में मीटर खरीद की होड़ पर उपभोक्ता परिषद पहुंचा नियामक आयोग, आयोग अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल व उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष की लम्बी बैठक।
- उपभोक्ता परिषद ने आयोग के सामने रखा तथ्य कहा उदय अनुबन्ध के तहत कम्पनियों ने बिजली दर प्रस्ताव में आयोग से कहा कि किसानों को छोड़कर 200 यूनिट प्रतिमाह से अधिक खपत करने वाले सभी उपभोक्ताओं के यहां लगेगा स्मार्ट मीटर फिर साधारण मीटर खरीदने पर कम्पनियां क्यों हैं आमादा?
- बिजली कम्पनियां पहले तय करें उपभोक्ताओं के परिसर पर लगेगा कौन सा मीटर? फिर फेज वाइज क्वालिटी चेक के आधार पर करें मीटर की खरीद।
- पावर कार्पोरेशन ने पूर्व में जिन मीटर निर्माताओं पर उठायी उंगली आज उन्हीं से हो रही है भारी खरीद।
- प्रदेश में स्मार्ट मीटर के लिये बिना इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किये केन्द्र की एजेन्सी द्वारा 40 लाख स्मार्ट मीटर खरीद का आर्डर अन्तिम दौर में।
लखनऊ 23 अक्टूबर। उप्र में जहां बिजली कम्पनियां अनमीटर्ड उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगाने हेतु नियामक आयोग आदेश के क्रम में शत-प्रतिशत मीटरिंग के लिये मीटर खरीद पर आमादा हैं जबकि यह सतत प्रक्रिया है। इसे फेज वाइज खरीद कर लगवाना चाहिए जिससे क्वालिटी चेक होती रहे, लेकिन यहां क्वालिटी के मामले पर पूरी तरह उदासीनता बरती जा रही है, मीटर खरीद के हाई प्रोफाइल मामले पर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल से मुलाकात कर लम्बी चर्चा की। उपभोक्ता परिषद द्वारा आयोग के सामने यह मुद्दा उठाया गया कि उदय अनुबन्ध के तहत बिजली कम्पनियों द्वारा आयोग में जो विद्युत दर प्रस्ताव के साथ एआरआर सौंपा गया है उसमें यह कहा गया है कि किसानों को छोड़कर सभी विद्युत उपभोक्ता जिनकी खपत 500 यूनिट प्रतिमाह से ऊपर है उनके यहां 30 जून, 2018 तक स्मार्ट मीटर लगा दिये जायेंगे और जिन उपभोक्ता की खपत 200 यूनिट प्रतिमाह के ऊपर है उनके यहां 31 मार्च 2020 तक स्मार्ट मीटर लगाये जायेंगे। वहीं दूसरी ओर बिजली कम्पनियां अब तक लगभग 48 लाख मीटर खरीद व लगाने का आर्डर दे चुकी हैं। लगभग इतने ही मीटर खरीद व लगाने की निविदा प्रक्रिया में है और वहीं दूसरी तरफ केन्द्र सरकार की एजेन्सी एनर्जी एफिशियन्सी सर्विसेज लिमिटेड (ईईसीएल) ने भी उ0प्र0 के लिये 40 लाख स्मार्ट मीटर खरीदने का आर्डर भी अन्तिम दौर में है। जिसकी कीमत लगभग 1320 करोड़ आयेगी। सवाल यह उठता है कि सबसे पहले बिजली कम्पनियां यह तय कर लें कि उन्हें उपभोक्ताओं के परिसर पर कौन सा मीटर लगाना है। यदि किसानों को छोड़कर 200 यूनिट से ऊपर खपत करने वाले सभी उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर ही लगाना है तो दूसरी तरफ बिजली कम्पनियां साधारण इलेक्ट्रानिक मीटर खरीद पर क्यों आमादा हैं? क्या आये दिन उप्र में मीटर लगते और बदलते रहेंगे?
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग के सामने यह भी रखा कि पूर्व में पावर कार्पोरेशन द्वारा अनेकों मीटर निर्माता कम्पनियों की जांच करायी गयी उनके खिलाफ रिर्पोट आई, उन्हें ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लिया गया और अन्ततः कम्पनियों के साथ सांठ-गांठ कर ब्लैकलिस्टिंग की कार्यवाही को दबा दिया गया और आज उन्हीं दागदार कम्पनियों से बिजली कम्पनियां मीटर खरीदने पर आमादा हैं।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने 40 लाख स्मार्ट मीटर खरीद पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि देश के लगभग 12 राज्यों असम, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, पाण्डुचेरी, महाराष्ट्र व चण्डीगढ़ में स्मार्ट मीटर के पायलट प्रोजेक्ट दिये गये हैं, जिन्हें जून 2017 में पूर्णतया उपयोग में आना था लेकिन आज तक पूर्णतया चलन में नहीं आया। वहीं दूसरी ओर उप्र में स्मार्ट मीटर लगाने के इन्फ्रास्ट्रक्चर तो नहीं तैयार हुआ लेकिन 40 लाख स्मार्ट मीटर की निविदा अन्तिम चरण में है। वह भी माॅडम बेस पर आधारित है। जबकि देश के दूसरे राज्य पूरी तरह रेडियो फ्रीक्वेन्सी माडल पर काम कर रहे हैं। माॅडम बेस सिस्टम में हर मीटर के अन्दर मोबाइल की भांति एक सिम लगेगा। वर्तमान में मोबाइल नेटवर्क का क्या हाल है? यह राम ही मालिक हैं।
नियामक आयोग अध्यक्ष ने पूरे मामले पर उपभोक्ता परिषद को आश्वासन दिया कि आयोग पूरे मामले पर नजर बनाये हुए है समय आने पर उचित निर्णय लेगा।







