NTPC हादसे के ज़िम्मेदारों के खिलाफ हो कठोर कार्रवाई: उपभोक्ता परिषद

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  • एनटीपीसी हादसे पर उपभोक्ता परिषद ने ऊंचाहार की 500 मेगावाट की यूनिट से जिन 8 राज्यों को मिलनी है बिजली उन सभी से उप्र सरकार की भांति गरीब मजदूरों के परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने की उठायी मांग।
  • उपभोक्ता परिषद ने कहा एनटीपीसी के उच्चाधिकारियों की जवाबदेही तभी होगी तय जब पूरे मामले की जांच केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण से करायी जाये।
  • एनटीपीसी के उच्चाधिकारियों के खिलाफ उदासीनता बरतने के लिये प्राथमिकी दर्ज कराना जरूरी जिससे भविष्य में इस प्रकार की न हो चूक।
लखनऊ 5 नवंबर। एनटीपीसी ऊंचाहार में विगत दिनों 500 मेगावाट यूनिट की इकाई में जो भीषण दुर्घटना हुई और उसमें दर्जनों मजदूरों व कुछ अभियन्ताओं की जान गई। निश्चिततौर पर उसमें कहीं न कहीं एनटीपीसी की उदासीनता के चलते ऐसा हुआ। विगत वर्ष में जब इस इकाई का स्टीमेट तैयार किया गया तो सभी मदों के साथ इसकी कुल लागत लगभग 3471 करोड़ आंकी गयी थी। एनटीपीसी की इस इकाई से जो बिजली पैदा होगी उससे नार्दन रीजन के कुल जिन 8 राज्यों को बिजली मिलनी है, ऐसे में गरीब मजदूर जो इस हादसे का शिकार हो गये। उनको सभी राज्यों द्वारा अपने-अपने स्तर से अतिरिक्त आर्थिक मदद उप्र सरकार की भांति देना चाहिए। अच्छा तो होगा कि सभी राज्य इन मजदूरों के आश्रितों को अपने यहां मृतक आश्रित कोटे में नौकरी देने पर भी विचार करें तो यह एक अच्छी पहल होगी।
उपभोक्ता परिषद पुनः एक बार यह मांग उठाता है कि इसके लिये दोषी उन उच्चाधिकारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाया जाये जिनकी उदासीनता के चलते यह घटना घटित हुई यह तभी सम्भव है जब ऊर्जा की सबसे बड़ी संस्था केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) से इसकी निष्पक्ष जांच करायी जाये और अविलम्ब उच्चाधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी जाये, जिससे आगे इस प्रकार की दुर्घटनाओं पर अंकुश लगे।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि एनटीपीसी ऊंचाहार की इस 500 मेगावाट यूनिट की इकाई से जिन 8 राज्यों को केन्द्र के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा अलग-अलग बिजली आवंटित है, वह निम्नानुसार हैः-
नार्दन रीजन                             कुल आवंटित शेयर (मेगावाट)
हरियाणा                                 37.95 मेगावाट
हिमाचल प्रदेश                          22.21 मेगावाट
जम्मू और कश्मीर                      55.19 मेगावाट
पंजाब                                     0.00 मेगावाट
राजस्थान                                74.09 मेगावाट
उत्तर प्रदेश                              173.14 मेगावाट
उत्तराखण्ड                               30.64 मेगावाट
चण्डीगढ़                                  4.19 मेगावाट
दिल्ली                                    27.59 मेगावाट
अनावंटित                                75.00 मेगावाट
कुल                                       500.00 मेगावाट
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा चूंकि गरीब मजदूर 500 मेगावाट यूनिट की इस इकाई पर जो अपना योगदान दे रहे थे उससे 8 राज्यों को बिजली मिलनी है, ऐसे में सभी राज्यों का नैतिक दायित्व है कि उप्र सरकार की भांति गरीब मजदूरों के परिवारों को अपनी आर्थिक सहायता दें।

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