दीपावली से पहले बिजली दर घोषित होने का सवाल ही नहीं: एसके अग्रवाल

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file photo
  • दीपावली के पहले बिजली दर घोषित कराने के लिये पावर कार्पोरेशन के दबाव पर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष व नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल की लम्बी वार्ता।
  • आयोग अध्यक्ष का आश्वासन अभी बिजली दर पर आयोग कर रहा है काम दीपावली से पहले बिजली दर घोषित होने का सवाल ही नहीं।
  • उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने फिर उठायी मांग विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के तहत पारदर्शी तरीके से सभी पक्षों के सवालों जवाबों को अध्ययन करने के बाद ही जारी हो टैरिफ अन्यथा प्रदेश की जनता समझेगी सुनवाई महज एक औपचारिकता।

लखनऊ 17 अक्टूबर। प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में पावर कार्पोरेशन द्वारा दबाव बनाकर दीपावली से 1 दिन पहले बढ़ोत्तरी कराये जाने के विरोध में जहां उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कल प्रदेश के ऊर्जामंत्री श्री श्रीकांत शर्मा से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की थी। आज वहीं उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री एके अग्रवाल से मुलाकात कर लम्बी बैठक की और कल दाखिल उपभोक्ता परिषद के जनहित प्रत्यावेदन पर चर्चा की। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग के सामने यह मुद्दा उठाया कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं व उपभोक्ता परिषद द्वारा दाखिल बिजली दर की आपत्तियों पर पावर कार्पोरेशन द्वारा गोलमोल मनगढ़ंत जवाब देकर बिजली दर बढ़वाने हेतु दबाव बनाया जा रहा है। इससे पूरे प्रदेश में यह संदेश जायेगा कि बिजली दरों पर आयोग द्वारा जो सुनवाई की गयी और उपभोक्ताओं से आपत्तियां व सुझाव लिये गये वह महज एक औपचारिकता थी। पावर कार्पोरेशन आयोग को अपने इशारे पर चलाना चाहता है, जो पूरी तरह असंवैधानिक है। सभी पक्षों को सुनने के बाद आयोग को पारदर्शी तरीके से निर्णय लेना चाहिए।
नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष से वार्ता के बाद यह आश्वासन दिया कि अभी महज 5 दिन पहले विद्युत उपभोक्ताओं की सुनवाई समाप्त हुई है। बिजली दर एक संवेदनशील व वित्तीय मानकों का महत्वपूर्ण मामला है। आयोग अभी सभी पक्षों की आपत्तियों व जवाबों पर अध्ययन कर रहा है। अभी दीपावली से पहले बिजली दर घोषित करने का कोई सवाल ही नहीं, क्योंकि अभी आयोग द्वारा टैरिफ आदेश को तैयार करने का काम शुरू किया गया है। आयोग विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के तहत उपभोक्ता हित में निर्णय लेगा। जिसमें किसी के दबाव का कोई मतलब नहीं है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस बार का बिजली दर प्रस्ताव एक वर्ष का न होकर मल्टीइयर टैरिफ से सम्बन्धित है, जो वर्ष 2017-18 से 2019-20 पर आधारित है। भले ही टैरिफ 2017-18 का तय हो रहा है लेकिन तीनों वर्षों के वित्तीय मानकों का अध्ययन करने के बाद ही टैरिफ का निर्धारण होना चाहिए। पावर कार्पोरेशन को स्वतः यह सोचना चाहिए कि 5 दिन पहले सुनवाई खत्म हुई और उसके तुरन्त बाद टैरिफ कैसे जारी हो सकती है।

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