क्या पावर कार्पोरेशन गारन्टी लेगा कि अब और नहीं बढ़ेगा घाटा: उपभोक्ता परिषद

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file photo
  • आज से पूरे प्रदेश में जहाँ बिजली दर बढ़ोत्तरी लागू हो गयी वहीं पूरे प्रदेश के ग्रामीण व किसान आन्दोलित व आक्रोषित हैं।
  • उपभोक्ता परिषद ने आज बिजली विभाग के घाटे पर किया बड़ा खुलासा, कहा पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन व समय-समय पर सरकार की गलत नीतियों के चलते वर्ष 2000 में 77 करोड़ का घाटा वर्तमान में पहुँचा 78 हजार करोड़
  • घाटे के लिए पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन व बिजली कम्पनियाँ जिम्मेदार, फिर उसका खामियाजा प्रदेश की जनता को क्यों?
  • वर्तमान में उदय व पावर फाॅर आल में करोड़ों रूपये के रखे गये कन्सलटेन्ट, क्या पावर कार्पोरेशन लेगा गारन्टी कि अब और नहीं बढ़ेगा घाटा?
लखनऊ 09 दिसम्बर। जहाँ पूरे उत्तर प्रदेश में आज से व्यापक बिजली दर बढ़ोत्तरी ग्रामीण किसानों व आम उपभोक्ताओं पर लागू हो गयी, और लगातार पूरे प्रदेश में किसान व ग्रामीण आन्दोलित हैं। उप्र सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है।  कहीं किसी ने मुँह खोला तो घाटे का रोना रोता रहे।  आज उपभोक्ता परिषद प्रदेश के उपभोक्ताओं को बताना चाहता है कि बिजली कम्पनियों के लगभग 78 हजार करोड़ घाटे के लिए पूरी तरीके से बिजली कम्पनियों का प्रबन्धन व सरकार द्वारा थोपी गयी समय-समय पर गलत नीतियाँ रहीं हैं, जिसमें उपभोक्ता का कोई भी दोष नहीं। जब जो सरकार आई बिजली दर उसने अपने ढंग से बिजली दरें बढ़ाईं, उपभोक्ताओं ने उसे भरा, जो सरकार आई, उसने अपने मनमाने तरीके से काम किया।
अंततः उसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ा। वर्तमान में पावर कार्पोरेशन की कोई ऐसी योजना नहीं है, जिसमें करोड़ों रूपये के कन्सलटेन्ट न रखे गये हों।  उदय व पावर फाॅर आल स्कीम में भी करोड़ों रूपये के कन्सलटेन्ट पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन ने रखा है, क्या प्रबन्धन इस बात की गारन्टी लेगा कि अब घाटा नहीं बढ़ेगा?  पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन अनेकों राज्यों में दौरे कर सुधार की संभावनायें भी तलाशता रहा।  इसके बावजूद भी सभी योजनायें आने वाले समय में स्वतः फ्लाप साबित रहीं और एक बार फिर अब उदय व पावर फाॅर आल की नाकामी का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ेगा।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि वर्ष 1959 में गठित राज्य विद्युत परिषद जिसका कुल घाटा वर्ष 2000 में मात्र 10 हजार करोड़ पहुच जाने पर सरकार ने घाटे का वहन करते हुये राज्य विद्युत परिषद को विघटित कर कई कम्पनियों में विभाजित कर दिया गया और बड़े-बड़े दावे किये गये कि अब बिजली कम्पनियों में व्यापक सुधार होगा, और प्रदेश की जनता को लाभ मिलेगा। बड़े दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि सुधार की बात तो दूर कम्पनियाँ घाटे में डूबती चली गयी।  वर्तमान में घाटों पर नजर डालें तो उदय स्कीम मंे कम्पनियों ने माना कि अब उनका कुल घाटा लगभग 70738 करोड़ है और वहीं पावर फार आल में माना कि वर्ष 2015-16 तक बिजली कम्पनियों का कुल घाटा लगभग 72770 करोड़ है। वर्तमान में यह 78 हजार करोड़ के ऊपर होगा, इसके लिये कौन जिम्मेदार है? बिजली कम्पनियों द्वारा 14 मार्चर्, 2013 में एफआरपी (वित्तीय पुनर्गठन योजना) लायी गयी और जिसको उ0प्र0 के मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदित किया गया। अब उदय व पावर फार आल के अनुबन्ध तहत सुधार की बात हो रही है, जबकि स्थिति पूरी तरह उल्टी है।
वर्ष                       बिजली कम्पनियों का कुल घाटा (करोड़ में)
2000-01              77 करोड़ (एफ0आर0पी0 के अनुसार)
2005-06              5439 करोड़ (एफ0आर0पी0 के अनुसार)
2007-08              13162 करोड़ (एफ0आर0पी0 के अनुसार)
2009-10              20104 करोड़ (एफ0आर0पी0 के अनुसार)
2010-11              24025 करोड़ (एफ0आर0पी0 के अनुसार)
जनवरी 2016 में       70738 करोड़ (उदय अनुबन्ध के अनुसार)
2015-16               72770 करोड़ (पावर फार आल के अनुसार)
वर्तमान में               लगभग 78000 करोड़ के ऊपर
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि बिजली विभाग का प्रबन्धन पहले तो पूरी तरह इंजीनियरों के हाथ में था, लेकिन जब से बागडोर नौकरशाहों ने संभाली, उस दौरान घाटा आसमान पर पहुँच गया, जो यह सिद्ध करता है कि नौकरशाहों के कार्यकाल में बिजली विभाग में मनमाने तरीके से नीतियाँ लागू की गयी और उसका खामियाजा जनता भुगत रही है।

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