955 करोड़ की वसूली पर आयोग सख्त, दिए कार्रवाई के निर्देश

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  • उपभोकता परिषद् की मांग 5 वर्षों में लगभग 955 करोड़ ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से की गयी अधिक वसूली को मय ब्याज सहित कराया जाय वापस
  • उपभोकता परिषद् के लोकमहत्व पुनर्विचार प्रत्यावेदन पर आयोग अध्यक्ष ने पावर कार्पोरेशन के प्रबन्ध निदेशक से 7 दिन में तलब की रिपार्ट
  • पिछले 5 सालों में गलत तरीके से वसूले गये 20% इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी पर आयोग का कड़ा निर्देश
लखनऊ 26 दिसम्बर। प्रदेश के लगभग 40 से 60 लाख ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से वर्ष 2012 में ऊर्जा विभाग द्वारा जारी इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी आदेश के विपरीत 5 प्रतिशत की जगह पिछले 5 वर्षों से 20 प्रतिशत वसूली का खुलासा उपभोक्ता परिषद द्वारा किये जाने के बाद पूरे प्रदेश में व बिजली विभाग में हंगामा मचा है पूरे मामले को लेकर प्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज उप्र विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल से मुलाकात कर एक लम्बी बैठक की एवं एक लोकमहत्व जनहित प्रत्यावेदन दाखिल किया और आयोग के सामने ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं के कुछ बिल भी रखे जिसमें गलत तरीके से 20 प्रतिशत वसूली के आधार पर बिल जारी किये गये थे।
उपभोक्ता परिषद ने आयोग से अनुरोध किया कि वसूले गये लगभग 955 करोड़ रूपये को मय व्याज सहित प्रदेश के ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं को वापस दिलाया जाये और इस चीटिंग के लिये दोषी उच्चाधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाय।
नियामक आयोग अध्यक्ष ने मामले की गम्भीरता को देखते हुये उपभोक्ता परिषद द्वारा दाखिल लोकमहत्व जनहित प्रत्यावेदन पर अपना फैसला सुनाते हुये प्रबन्ध निदेशक उप्र पावर कार्पोरेशन से 7 दिन के अन्दर पूरी विस्तृत रिपार्ट आयोग के समक्ष रखने का निर्देश दिया आयोग द्वारा जारी निर्देश को आयोग के निदेशक (टैरिफ) डा. अमित भार्गव द्वारा प्रबन्ध निदेशक को भेज दिया गया है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने दाखिल अपने लोकमहत्व जनहित प्रत्यावदेन में यह मुद्दा उठाया कि शासन द्वारा जारी अधिसूचना में घरेलू उपभोक्ताओं के लिये 5 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी वसूलने, राज्य के सरकारी विभागों से 5 प्रतिशत वसूलने एवं सरकारी व घरेलू को छोड़कर अन्य से 7.5 प्रतिशत व अनमीटर्ड उपभोक्ताओं से फिक्स चार्ज पर 20 प्रतिशत वसूलने का आदेश जारी हुआ था, यानि कि इस आदेश से पूरी तरह स्पष्ट है कि घरेलू व सरकारी उपभोक्ताओं से 5 प्रतिशत से ऊपर नहीं वसूला जायेगा। लेकिन अर्थ का अनर्थ लगाकर प्रदेश की बिजली कम्पनियां लाखों की संख्या में अनमीटर्ड घरेलू ग्रामीण उपभोक्ताओं, जो फिक्स चार्ज वर्तमान में रू0 300 प्रति किलोवाट अदा कर रहे हैं और पहले रू0 180 प्रति किलोवाट दे रहे थे उनसे 20 प्रतिशत की वसूली वर्षो की जा रही है, जबकि उनसे केवल 5 प्रतिशत ही वसूला जाना था।
गाॅव का विद्युत उपभोक्ता जो नियम कानूनों से अनभिज्ञ पावर कारपोरेशन के हर आदेश को मानता है लेकिन पावर कारपोरेशन ने 5 साल से लाखों विद्युत उपभोक्ताओं के साथ जो चीटिंग की गयी वह अपने आप में गंभीर मामला है। वर्तमान में 2017-18 में प्रदेश में लगभग 37 लाख विद्युत उपभोक्ता अनमीटर्ड हैं उनका कुल भार लगभग 59 लाख है हर 1 किलोवाट के अनमीटर्ड ग्रामीण उपभोक्ता जो रू0 180 प्रतिकिलो वाट अदा कर रहे थे उनसे बिजली कम्पनियों ने रूपया 27 हर माह अधिक वसूला यानि कि साल में 1 किलोवाट वाले उपभोक्ता से 324 रूपया ज्यादा लिया यदि कुल 59 लाख विद्युत उपभोक्ताओं से 12 माह में अधिक वसूली पर नजर डालें तो यह लगभग रूपया 191 करोड होगा। अगर 5 सालों में इसे देखा जाये तो लगभग रूपया 955 करोड आयेगा। वास्तविक आंकडे पूरे 5 साल का मिलान के बाद ही स्वतः तय होगा। उपभोक्ता परिषद ने आयोग से प्रदेश के ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से बिजली कम्पनियांे ने जो करोडों अरबों अधिक वसूला है अविलम्ब उसे मय ब्याज सहित वापस कराने की मांग की है और साथ ही  आयोग से यह भी मांग उठाई है कि अर्थ का अनर्थ लगाकर उपभोक्ताओं के साथ चीटिंग कराने के लिये कौन से उच्चाधिकारी जिम्मेदार हैं उन पर भी कार्यवाही हो।

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