- नियामक आयोग द्वारा गठित जांच समिति का कड़ा फैसला।
- फ्लूएण्ट ग्रिड बिलिंग एजेन्सी के अधिकृत प्रतिनिधि व अधीक्षण अभियन्ता आरएपीडीआरपी को व्यक्तिगत रूप से जांच समिति ने 19 जनवरी को सभी अभिलेख लेकर उपस्थित होने का दिया निर्देश।
- प्रदेश में लाखों अनमीटर्ड किसानों से बिलिंग एजेन्सियों के माध्यम से गलत बिल निर्गत कर की गयी अधिक वसूली पर नियामक आयोग द्वारा गठित जांच समिति ने उठाये कड़े कदम।
- जांच समिति ने निदेशक वाणिज्य मध्यांचल द्वारा जांच समिति को अपेक्षित सहयोग न देने को बताया गम्भीर एमडी मध्यांचल को अवगत कराने का दिया निर्देश।
- एचसीएल बिलिंग एजेन्सी द्वारा सौंपे गये अभिलेख में बिना मीटर के उपभोक्ताओं पर नारमेटिव बिलिंग का मामला उलझा, समिति ने बताया नियम विरूद्ध तलब की रिर्पोट।
लखनऊ 28 दिसम्बर। प्रदेश के लाखों अनमीटर्ड किसानों की बिजली दरों में नियामक आयोग आदेश के विपरीत बिलिंग एजेन्सी मे. फ्लूएण्ट ग्रिड के साफ्टवेयर द्वारा मनमाने तरीके से 80 यूनिट प्रति हार्सपावर के आधार पर 5 हार्स पावर के किसानों के ट्यूबवेल से रू0 3097 प्रतिमाह की करायी जा रही वसूली, जबकि नियमानुसार 5 हार्स पावर पर रू. 834 की वसूली होनी चाहिए। बिजली दर की सुनवाई में उपभोक्ताओं द्वारा की गयी शिकायत को नियामक आयोग ने गम्भीरता से लेते हुए विगत माह एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की थी।
उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच समिति की आज द्वितीय बैठक नियामक आयोग सभागार में सम्पन्न हुई। जिसमें जांच समिति के सदस्य नियामक आयोग के निदेशक टैरिफ डा. अमित भार्गव, पावर कार्पोरेशन रेगुलेटरी अफेयर्स यूनिट (आरएयू) के मुख्य अभियन्ता श्री नीरज अग्रवाल व प्रदेश के उपभोक्ताओं की तरफ से जांच समिति में शामिल उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा उपस्थित थे। जांच समिति ने सभी प्रबन्ध निदेशकों को किसानों से की गयी ज्यादा वसूली पर उनसे पूरी रिर्पोट भी तलब की गयी है और अधिक वसूली को किसानों के अगले बिलों में समायोजित करने का पूर्व में जारी आदेश का शत प्रतिशत क्रियान्वयन रिर्पोट मांगी है।
जांच समिति ने बार-बार निर्देशों के बावजूद भी फ्लूएण्ट ग्रिड बिलिंग एजेन्सी द्वारा सत्यापित अभिलेख जांच समिति के सामने उपलब्ध न कराने के मामले को गम्भीरता से लेते हुए यह निर्णय दिया है कि फ्लूएण्ट ग्रिड बिलिंग एजेन्सी के अधिकृत प्रतिनिधि व इंजीनियर और कान्ट्रैक्ट आरएपीडीआरपी पार्ट-ए के अधीक्षण अभियन्ता पावर कार्पोरेशन दिनांक 19 जनवरी, 2018 को प्रातः 11 बजे सत्यापित अभिलेखों के साथ जांच समिति के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।
जांच समिति द्वारा मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक, वाणिज्य जो स्वयं जांच समिति के सदस्य हैं, उनके द्वारा आज की बैठक मे उपस्थित न होना और जांच समिति को अपेक्षित सहयोग न देने के मामले पर खेद व्यक्त करते हुए उसे गम्भीरता से लिया गया है और मुख्य अभियन्ता आरएयू को यह निर्देश दिये गये हैं कि इस गम्भीर विषय की पूरी जानकारी से प्रबन्ध निदेशक मध्यांचल को अवगत करा दिया जाये। साथ ही एचसीएल बिलिंग एजेन्सी को पुनः सत्यापित जो अभिलेख उससे मांगे गये हैं, जिसमें से एचसीएल द्वारा कुछ अभिलेख दिये गये हैं और कुछ नहीं दिये गये हैं उसी भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
जांच समिति द्वारा इस बात पर भी नाराजगी व्यक्त की गयी कि मुख्य अभियन्ता वाणिज्य मध्यांचल द्वारा किसानों की बिलिंग में त्रुटि को पहली बैठक में स्वीकार किये जाने के बावजूद भी उस पर कोई जवाब न दिये जाने पर खेद व्यक्त किया गया है। जांच समिति द्वारा फ्लूएण्ट ग्रिड एजेन्सी की इस नियम विरूद्ध कार्यवाही पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की गयी है कि उसके द्वारा जांच समिति को कल एक ई मेल के माध्यम से हजारों पन्ने का एक लिंग भेजा गया, जो जांच समिति के लिये अनुपयोगी है। भविष्य में इस प्रकार की नियम विरूद्ध कार्यवाही न करने का निर्देश दिया गया।
एचसीएल द्वारा सौंपे गये अभिलेखों में निदेशक वाणिज्य पावर कार्पोरेशन द्वारा नारमेटिव बिलिंग से सम्बन्धित एक आदेश जो डिफेक्टिव मीटर व मीटर न होने की स्थिति में घरेलू उपभोक्ताओं के लिये 155 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिमाह वाणिज्य के लिये 260 प्रति किलोवाट प्रतिमाह व लघु एवं मध्यम औद्योगिक के लिये 260 प्रति किलोवाट प्रतिमाह के आदेश को लागू किये जाने पर भी नाराजगी व्यक्त करते हुए जांच समिति द्वारा उसे आयोग आदेशों के विपरीत बताते हुए मुख्य अभियन्ता आरएयू से वाणिज्य शाखा द्वारा अभिमत लेकर जांच समिति के सामने रखने का निर्देश दिया गया है।







