अविलम्ब UPPCL रेगुलेटरी सरचार्ज पर समाचार पत्रों में जारी कराये अपना शुद्धि-पत्र: आयोग

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  • उपभोक्ता परिषद के प्रत्यावेदन पर UPPCL को पुनः लगी फटकार
  • अतिरिक्त रेगुलेटरी सरचार्ज सम्बन्धी सार्वजनिक सूचना पर पावर कारपोरेशन को नियामक आयोग ने लिया आड़े हाथों, निदेशक (वाणिज्य) के जवाब को किया खारिज
  • पूर्व में पावर कारपोरेशन द्वारा आयोग आदेश का गलत व्याख्या कर समाचार पत्रों में आयोग आदेशानुसार राजस्व अन्तर की प्राप्ति हेतु अतिरिक्त सरचार्ज लगाये जाने की सार्वजनिक सूचना करायी गयी थी प्रकाशित
लखनऊ 16 सितम्बर। उप्र पावर कारपोरेशन द्वारा बिजली कम्पनियों के लिए मल्टी ईयर टैरिफ व वर्ष 2017-18 हेतु प्रस्तावित व्यापक बिजली दर बढ़ोत्तरी प्रस्ताव के साथ समाचार पत्रों में प्रकाशित कराई गई रेगुलेटरी सरचार्ज सम्बन्धी सार्वजनिक सूचना पर विगत् सप्ताह उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष, अवधेश कुमार वर्मा द्वारा दाखिल जनहित प्रत्यावेदन पर उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा उसे गलत करार देते हुए संशोधित सार्वजनिक सूचना सम्बन्धी शुद्धि-पत्र पुनः प्रकाशित कराये जाने के आदेश पावर कार्पोरेशन को दिये गये थे और साथ ही निदेशक वाणिज्य, पावर कार्पोरेशन का आयोग द्वारा स्पष्टीकरण माँगा गया था, जिसके सम्बन्ध में पावर कार्पोरेशन के निदेशक वाणिज्य श्री संजय सिंह द्वारा 3 दिन पूर्व नियामक आयोग में अपना जवाब दाखिल करते हुए आयोग को संतुष्ट करने की कोशिश की गई थी कि पावर कार्पोरेशन द्वारा जो सार्वजनिक सूचना समाचार पत्रों में प्रकाशित कराई गई है वह उचित है, उस पर कोई शुद्धि-पत्र जारी करने की आवश्यकता नहीं है।
उप्र विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन श्री एसके अग्रवाल द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए पावर कार्पोरेशन द्वारा प्राप्त निदेशक, वाणिज्य के जवाब पर गम्भीरता से गहन समीक्षा के फलस्वरूप अपना फैसला सुनाते हुए पावर कार्पोरेशन द्वारा आयोग में दाखिल जवाब को खारिज कर दिया गया और पुनः पावर कार्पोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) श्री संजय सिंह को स्पष्ट निर्देश भेजे गये कि अविलम्ब समाचार पत्रों में इस आशय का शुद्धि-पत्र प्रकाशित कराया जाये कि पावर कार्पोरेशन द्वारा केवल रेगुलेटरी सरचार्ज प्रस्तावित किया गया है।  आगे आयोग का रेगुलेटरी सरचार्ज पर जो निर्णय होगा, वही मान्य होगा।
गौरतलब है कि पहले पावर कार्पोरेशन द्वारा आयोग आदेश को तोड़-मरोड़ कर समाचार पत्रों में यह प्रकाशित करा दिया गया था कि ‘‘राजस्व अन्तर की प्राप्ति हेतु रेगुलेटरी सरचार्ज माननीय आयोग के अनुमोदनानुसार अतिरिक्त लगाया जायेगा’’ जिसका उपभोक्ता परिषद ने कड़ा विरोध करते हुए आयोग अध्यक्ष को यह अवगत कराया गया था कि पावर कार्पोरेशन में पहले से कैसे मान लिया गया कि आने वाले समय में आयोग द्वारा अतिरिक्त रेगुलेटरी सरचार्ज लगाया ही जायेगा।  हो सकता है कि जनता को रेगुलेटरी लाभ ही मिल जाये।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कार्पोरेशन द्वारा आम जनता पर बोझ डलवाने के लिए पहले से ही माहौल बनाया जाने लगता है।  जहाँ तक सवाल है ट्रु-अप याचिका पर निर्णय होने के उपरान्त रेगुलेटरी सरचार्ज पर आयोग के निर्णय का, तो इस मुद्दे पर आम जनता की सार्वजनिक सुनवाई के बाद आयोग को तय करना है कि रेगुलेटरी सरचार्ज लगाया जायेगा या प्रदेश की जनता को रेगुलेटरी लाभ दिया जायेगा।  पहले से ही पावर कार्पोरेशन द्वारा यह अनुमान लगाया जाना कि अतिरिक्त रेगुलेटरी सरचार्ज लगाया जायेगा या पूरी तरह आयोग अधिकार का उल्लंघन है।
संलग्नकः- आयोग आदेश की प्रति।

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