नियामक आयोग में दाखिल किया लोक महत्व प्रस्ताव
लखनऊ, 17 जून 2025: उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा बिजली दरों में 30% से 45% तक की व्यापक बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर विवाद गहरा गया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस प्रस्ताव को गुपचुप तरीके से वेबसाइट पर डालने और जनता से पारदर्शिता बरतने में विफल रहने का आरोप लगाया है। परिषद ने विद्युत नियामक आयोग (UPERC) में एक लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल कर मांग की है कि पावर कॉरपोरेशन के प्रस्ताव को समाचार पत्रों में विज्ञापन के माध्यम से सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करा सके।
गुपचुप प्रस्ताव पर सवाल: परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन ने बिना नियामक आयोग की अनुमति के प्रस्ताव को वेबसाइट पर डालकर औपचारिकता पूरी करने की कोशिश की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रस्ताव मनगढ़ंत आंकड़ों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बड़े निजी घरानों को लाभ पहुंचाना है। वर्मा ने कहा, “पावर कॉरपोरेशन ने निजीकरण की प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए दरों में भारी इजाफा प्रस्तावित किया है, ताकि निजी कंपनियों को आकर्षित किया जा सके।”
उपभोक्ता परिषद ने तुलनात्मक अध्ययन पेश किया: उपभोक्ता परिषद ने शहरी घरेलू उपभोक्ताओं की वर्तमान और प्रस्तावित दरों का तुलनात्मक अध्ययन पेश किया, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। वर्तमान में 1 किलोवाट से 5 किलोवाट तक के उपभोक्ता प्रति यूनिट 6.60 से 8.38 रुपये का भुगतान करते हैं, जबकि प्रस्तावित दरें 8.40 से 12 रुपये प्रति यूनिट तक हैं। यदि इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी जोड़ी जाए, तो यह दर 13 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच सकती है। परिषद ने इसे “टैरिफ शॉक” करार देते हुए कहा कि यह उपभोक्ताओं को “लालटेन युग” में धकेलने वाला कदम है।
आंकड़ों में प्रस्तावित बढ़ोतरी:
1 किलोवाट, 100 यूनिट: वर्तमान भुगतान 660 रुपये (6.60 रुपये/यूनिट), प्रस्तावित 840 रुपये (8.40 रुपये/यूनिट)
2 किलोवाट, 200 यूनिट: वर्तमान 1345 रुपये (6.73 रुपये/यूनिट), प्रस्तावित 1830 रुपये (9.15 रुपये/यूनिट)
3 किलोवाट, 300 यूनिट: वर्तमान 2055 रुपये (6.85 रुपये/यूनिट), प्रस्तावित 2830 रुपये (9.40 रुपये/यूनिट)
5 किलोवाट, 500 यूनिट: वर्तमान 3575 रुपये (7.15 रुपये/यूनिट), प्रस्तावित 5000 रुपये (10 रुपये/यूनिट)
5 किलोवाट, 200 यूनिट: वर्तमान 1675 रुपये (8.38 रुपये/यूनिट), प्रस्तावित 2400 रुपये (12 रुपये/यूनिट)
उपभोक्ता परिषद की मांग: परिषद ने दावा किया कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 33,122 करोड़ रुपये का सरप्लस है, जिसके आधार पर बिजली दरों में 40-45% की कमी की जानी चाहिए। वर्मा ने कहा कि यदि आयोग इस प्रस्ताव पर चर्चा चाहता है, तो परिषद खुले मंच पर इसे खारिज करने योग्य साबित कर देगी। उन्होंने आयोग से स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्णय लेने की अपील की।
निजीकरण का आरोप: परिषद ने पावर कॉरपोरेशन पर निजीकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए जानबूझकर घाटा दिखाने का आरोप लगाया। वर्मा ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर परियोजना में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 18,885 करोड़ रुपये के बजाय 27,342 करोड़ रुपये के टेंडर दिए गए, जिसका अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।
आगामी सुनवाई: नियामक आयोग ने 7 जुलाई 2025 को सार्वजनिक सुनवाई की तारीख तय की है, जिसमें उपभोक्ता, परिषद, पावर कॉरपोरेशन और विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो यह उत्तर प्रदेश के इतिहास की सबसे बड़ी बिजली दर वृद्धि होगी।
उपभोक्ता परिषद ने जनता से अपील की है कि वे इस प्रस्ताव के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज कराएं और बिजली दरों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए एकजुट हों।







