जनतांत्रिक विकास पार्टी लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर उतारेगी अपने उम्मीदवार
पटना, 08 जून। जनतांत्रिक विकास पार्टी आगामी लोकसभा और विधान सभा के चुनावों में बिहार की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। ये जानकारी आज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कुमार ने पटना में पार्टी ऑफिस में संवाददाता सम्मेलन की दौरान दी। उन्होंने कहा कि जनतांत्रिक विकास पार्टी बिहार की जनता को एक सशक्त विकल्प देगी। इसकी तैयारी पार्टी ने बूथ स्तर पर शुरू भी कर दी है।
हम सत्ता की राजनीति से परे गरीब, पिछड़े, दलितों, महादलितों व जरूरतमंदों को मुख्यधारा की लाने में विश्वास करते हैं।
श्री कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल पर भी सवाल उठाया और एक रिपोर्ट कार्ड जारी कर नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार 2005 से बिहार के भाग्य विधाता बने हुए हैं और स्वयं ही न्याय के साथ विकास का ढोल पीटते हैं। या फिर अपने चेले-चपाटों से अपनी बड़ाई सुनते हैं। मगर हकीकत किसी से छुपा नहीं है। पिछली बार भी बिहार में बहार लाने के नारे के साथ सत्ता में तो आये, मगर राज्य में बहार तो नहीं आया, लेकिन बिहार को जरूर बुहार दिया।
उन्होंने कहा कि बिहार की बदहाली की कहानी सिर्फ हम नहीं कह रहे हैं। सरकारी आकड़े ही राज्य में उनके द्वारा किये गए विकास के पोल खोलती है। आलम ये है कि आम जनता को भी अब नीतीश सरकार पर भरोसा नहीं रहा है। Institute for Competitiveness & the Social Progress Imperative (ICSPI) द्वारा जारी 2005 से 2017 तक के आंकड़े बताते हैं कि जहां देश का समग्र विकास सूचकांक 0.624 है, वहीं बिहार का सबसे कम 0.536 है। इसी तरह समग्र सामाजिक विकास सूचकांक जहां भारत का 57.03 रहा, वहीं बिहार 44.89 के साथ इसमें भी अंतिम पायदान पर रहा।
श्री कुमार ने कहा कि मूलभूत मानवीय आवश्यकताओं में जहां गोवा 76.6 अंकों के साथ अव्वल रहा, वहीं बिहार 52.7 के साथ नीचे से तीसरे स्थान पर है। भलाई की बुनियाद (साक्षरता दर, स्कूल में नामांकन अनुपात, लैंगिक समानता सकल, शिक्षा पर व्यय आदि) में बिहार का स्थान 47.2 अंकों के साथ नीचे से तीसरा स्थान और बाल श्रम, भ्रष्टाचार, न्यायापालिका, महाविद्यालय आदि 34.7 अंकों के साथ सबसे निचले स्थान पर है। वहीं स्वास्थ्य के मामले में बिहार का स्थान 21 वां है। राज्य में निजी सेवाओं की निर्भरता 91 फीसदी है। वहीं, खेती एवं संबंद्ध क्षेत्रों में विकास दर साल 2005-10 में 5.4 प्रतिशत से घटकर 2015-16 में 3.7 प्रतिशत रह गया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रथम कृषि रोड मैप प्रारंभ करने के पूर्व राज्य के 40 फीसदी सूखा और 40 फीसदी बाढ़ प्रभावित कृषि योग्य भूमि की समस्याओं का हल नहीं किया। शिक्षा के क्षेत्र में भी बिहार की स्थ्िाति किसी से छुपी नहीं। आज भी प्राथमिकता स्कूल छोड़ने वालों का प्रतिशत 62 है। प्राथमिक शिक्षा पर प्रति छात्र व्यय 5298 रू है, जो भारत में सबसे कम है। राज्य में जहां प्राथमिक शिक्षा में 2,78602 और राज्य विश्वविद्यालय में 6,000 शिक्षकों की कमी है। राज्य में प्रति एक लाख छात्रों पर 6 कॉलेज हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 26 है।
श्री कुमार ने बिहार में प्रति व्यक्ति वार्षिक औसत आय को राष्ट्रीय औसत से कम बताया। उन्होंने कहा कि 2016-17 में बिहार में यह 35590 रू है, जबकि राष्ट्रीय औसत 103870 रूपये है। वहीं नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, 2016 में बिहार में हत्या के 2851, चोरी 22228, डकैती 349, लूटपाट 1410, दंगा 11617,अपहरण, 7324, जालसाजी 1358 और दहेज हत्या के 987 मामले सामने आये। इस नीतीश कुमार के न्याय के साथ विकास के दावों की पोल खोलता है।







