कांग्रेस में शामिल होने से पहले 4-5 सेकेण्ड के लिए फिर से बसपा’ में शामिल हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी”

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किसी के टोकने पर अचानक आया ख्याल तो बोले सॉरी कांग्रेस  में हो रहा हूँ शामिल।

सोशल मीडिया पर बना जॉइनिंग का मजाक। आलाकमान जोइंनिग के मौके पर इस वाकये से नाराज

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता संजय दीक्षित ने की मुखालफत शुरू

 

लखनऊ, 22 फरवरी। नई दिल्ली के 24, अकबर रोड स्थित एआईसीसी (कांग्रेस मुख्यालय) दफ्तर पर एक तरफ नसीमुद्दीन कांग्रेस ज्वाइन कर रहे थे, दूसरी ओर लखनऊ में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता संजय दीक्षित ने उनकी मुखालफत शुरू कर दी। वह अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं-

जनाधार वाले नेता पार्ती मे आये उनका हृदय से स्वागत है, लेकिन केन्द्रीय नेतृत्व को कुछ नेताओं द्वारा अपने निजी स्वार्थों को पूरा करने के लिये मिसगाइड किया जा रहा है। यह पार्टी की यूपी इकाई के लिये आत्मघाती साबित हो रहा है। अन्य दलों के कुछ रिजेक्टेड और बदनाम छवि/भ्रष्टाचार में सिर तक डूबे हुए नेताओं को पार्टी में शामिल करवाने और पार्टी की इमेज को चौपट करने वाले लोग कांग्रेस में शामिल किए जा रहे हैं। सवाल यहां यह उठता है कि उन नेताओं को जिनकी अपने समाज और क्षेत्रों में कोई मान्यता नहीं है और उनका खुद का समाज उन पर भरोसा नहीं करता उन्हें शामिल करवाने का मुख्य उद्देश्य उनकी काली कमाई के अकूत भंडार से कुछ हिस्सा झटकने के साथ पार्टी की ईमानदार सेक्युलर और गांधीवादी छवि को धूलधूसरित कर अपना स्वार्थ पूरा किया जा रहा है।’

बसपा सुप्रीमो मायावती का दाहिना हाथ रहे नसीमुद्दीन:

कभी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती का दाहिना हाथ रहे नसीमुद्दीन आज अपने कई समर्थकों के साथ पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में कांग्रसी हो गए। बसपा के बड़े मुस्लिम चेहरे रहे नसीमुद्दीन की कभी पार्टी और सरकार में तूती बोलती थी। सिद्दीकी के साथ तीन पूर्व मंत्री, चार पूर्व सांसद, लगभग तीन से चार दर्जन पूर्व विधायक, विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ चुके उम्मीदवारों के भी कांग्रेस में शामिल हुए। कभी बीएसपी के उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी के प्रभारी रह चुके नसीमुद्दीन सिद्दीकी प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। पिछले वर्ष 10 मई को मायावती ने पैसों के लेन-देन में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। एक सप्ताह बाद ही नसीमुद्दीन ने अपने समर्थकों के साथ एक नई पार्टी राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा बना ली थी।

संजय दीक्षित मनरेगा को लेकर काफी चर्चित रहे:

दो-तीन पीढ़ी से कांग्रेस से जुड़े संजय दीक्षित मनरेगा को लेकर काफी चर्चित रहे। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान इन्होंने यूपी में अकेले तत्कालीन उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की किसान यात्रा निकालकर विरोध किया। राहुल की खाट पंचायत यात्रा में इन्होंने मुख्य भूमिका का निर्वहन किया। यूपी में मनरेगा में चल रहे कथित भ्रष्टाचार की खिलाफत करके यह चर्चा में आए थे। सूत्रों का कहना है कि उस समय संजय दीक्षित बसपा के इसी कद्दावर नेता के खिलाफ मोरचा खोले हुए थे, जो आज कांग्रेसी हो गया।