नई दिल्ली: लगता है राहुल गाँधी अब रुकने वाले नहीं है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार, 10 अगस्त 2025 को चुनाव आयोग (ईसीआई) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों में ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए एक नई वेबसाइट ‘वोट चोरी’ (votechori.in) लॉन्च की। राहुल गांधी का दावा है कि यह वेबसाइट जनता को मतदाता सूची की पारदर्शिता की मांग उठाने और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को उजागर करने में मदद करेगी।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “वोट चोरी ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के मूल सिद्धांत पर हमला है। स्वच्छ और पारदर्शी मतदाता सूची निष्पक्ष चुनावों के लिए जरूरी है। हमारी मांग साफ है—चुनाव आयोग डिजिटल मतदाता सूची जारी करे ताकि जनता और राजनीतिक दल उसकी जांच कर सकें। हमारी इस मांग का समर्थन करें, votechori.in/ecdemand पर जाएं या 9650003420 पर मिस्ड कॉल दें। यह लड़ाई हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने की है।”
क्या है विवाद?
राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1,00,250 वोटों की ‘चोरी’ हुई। उनके मुताबिक, कांग्रेस की आंतरिक जांच में पाया गया कि डुप्लिकेट प्रविष्टियों, फर्जी पतों और एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में मतदाता पंजीकरण के जरिए यह हेराफेरी की गई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को कर्नाटक में 16 सीटें जीतने की उम्मीद थी, लेकिन केवल 9 सीटें मिलीं, और इस ‘वोट चोरी’ ने परिणामों को प्रभावित किया।
राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि
चुनाव आयोग ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया और जनता के सवालों से बचने के लिए मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में अपनी वेबसाइट को कथित तौर पर बंद कर दिया। बेंगलुरु में आयोजित ‘वोट अधिकार रैली’ में उन्होंने कहा, “जब मैंने डेटा के आधार पर सवाल उठाए, तो चुनाव आयोग ने अपनी वेबसाइट बंद कर दी। यह दर्शाता है कि वे सच को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।”
चुनाव आयोग का जवाब
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को ‘भ्रामक’ और ‘बेबुनियाद’ करार देते हुए खारिज किया है। आयोग ने कहा कि उसकी वेबसाइट बिना किसी रुकावट के काम कर रही है और मतदाता सूची पारदर्शी तरीके से तैयार की गई है। आयोग ने राहुल गांधी से मांग की कि वे अपने दावों को साबित करने के लिए ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ के तहत हलफनामा दाखिल करें या देश से माफी मांगें। आयोग ने यह भी कहा कि अगर राहुल अपने दावों पर यकीन करते हैं, तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
विपक्षी नेताओं का मिला समर्थन
राहुल गांधी के आरोपों को कई विपक्षी नेताओं का समर्थन मिला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, शिवसेना (यूबीटी) के आदित्य ठाकरे और शरद पवार ने उनके दावों का समर्थन करते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। सिद्धारमैया ने कहा कि कर्नाटक सरकार इस मामले की जांच के लिए कानून विभाग को निर्देश दे चुकी है।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहुल के आरोपों को ‘निराधार’ और ‘चुनावी हार की हताशा’ का परिणाम बताया। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि कांग्रेस हर हार के बाद संस्थानों पर दोष मढ़ती है, लेकिन सबूत पेश करने में नाकाम रहती है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने सुझाव दिया कि राहुल को अपने आरोपों को लेकर सीधे आयोग या अदालत का रुख करना चाहिए।
क्या है ‘वोट चोरी’ वेबसाइट?
राहुल गांधी द्वारा लॉन्च की गई वेबसाइट ‘वोट चोरी’ जनता को मतदाता सूची की जांच में शामिल होने और पारदर्शिता की मांग करने के लिए एक मंच प्रदान करती है। इस वेबसाइट पर लोग अपने सुझाव और शिकायतें दर्ज कर सकते हैं। राहुल का कहना है कि यह मंच जनता को यह समझाने के लिए है कि उनकी आवाज और वोट की रक्षा कैसे की जाए।
जनता का भरोसा हो रहा प्रभावित
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। राहुल गांधी ने दावा किया है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भी 1 करोड़ नए मतदाताओं को जोड़ा गया, जिसने परिणामों को प्रभावित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद न केवल चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि देश में संस्थानों के प्रति जनता के भरोसे को भी प्रभावित कर सकता है।
राहुल गांधी के इस कदम ने एक बार फिर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। अब सवाल यह है कि क्या यह मंच जनता को एकजुट कर पाएगा या यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा? इस बीच, जनता यह उम्मीद कर रही है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।







