बहुमत के बल पर लोगों की आवाज दबाकर बिजली का निजीकरण कर रही है सरकार: अजय कुमार लल्लू

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केन्द्र सरकार एवं प्रदेश सरकार द्वारा देकर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है

लखनऊ, 28 मार्च। कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार बहुमत के बल पर उप्र की जनता एवं कर्मचारियों की आवाज दबाकर बिजली का निजीकरण कर रही है। उन्होंने यह बात प्रदेश सरकार द्वारा 5 जनपदों की बिजली निजी हाथों में दिये जाने के संबंध में सरकार के निर्णय तथा 27 मार्च को नियम-311 के तहत उठाये गये मुद्दे पर चर्चा के दौरान ऊर्जा मंत्री द्वारा दिये गये बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कही।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से एक-एक करके सरकारी विभागों का कार्य निजी हाथों में केन्द्र सरकार एवं प्रदेश सरकार द्वारा देकर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है उसकी हम घोर निन्दा करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जिन 5 जनपदों- लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ तथा मुरादाबाद की बिजली व्यवस्था निजी हाथों में दिये जाने का निर्णय लिया गया है उससे बिजली विभाग के कर्मचारियों, अभियंताओं तथा उनके विभिन्न संगठनों में व्यापक आक्रोष हैं।

उनका कहना है कि यह निर्णय विद्युत अधिनियम-2003 के प्राविधानों के विपरीत है। उक्त अधिनियम की धारा-14 के तहत इन जनपदों में फ्रेंचाइजी दी जा रही है जबकि उक्त धारा में कहीं भी फ्रेंचाइजी का उल्लेख नहीं है। इसी अधिनियम की धारा-5 में फ्रेंचाइजी का उल्लेख ग्रामीण क्षेत्र के लिए किया गया है न कि शहरी क्षेत्र के लिए।

इस प्रकार से उक्त अधिनियम के किसी भी धारा के तहत शहरी एवं लाभ के क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था फ्रेंचाइजी को नहीं दी जा सकती। इन्हीं 5 जनपदों की विद्युत व्यवस्था के सुधार के संदर्भ में भारत सरकार द्वारा एपीडीआरपी और आईपीडीएस योजना के तहत रु0 4511 करोड़ 88 लाख स्वीकृत किया था जिसके द्वारा इन जनपदों में सभी विद्युत उपकरण, ट्रांसमिशन लाइन आदि में व्यापक सुधार एवं नवीनीकरण का कार्य कराया गया है तथा यह सभी जनपद लाभ में हैं फिर यहां की बिजली को बिना विद्युत नियामक आयोग की सलाह एवं समर्थन के बिना ऐसा कार्य किया जाना यह सिद्ध करता है कि यह केवल बड़े पूंजीपतियों एवं गुजरात से आये बड़े व्यवसायियों के हाथ में देकर उनको लाभ पहुंचाने का सरकारी प्रयास है। ऐसा जन विरोधी निर्णय करके यह सरकार अपने 324 विधायकों के बल का दंभ भर रही है तथा अनाप-शनाप कार्य कर रही है। एक-एक करके यह सरकार सभी विभागों का निजीकरण कर देगी। इस निर्णय से विद्युत कर्मचारियों, अभियंताओं के साथ ही साथ देष की 22 करोड़ जनता को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

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