रामधेर पर एक करोड़ रुपये का था इनाम, साथ में 11 उच्च कैडर के माओवादियों ने भी छोड़ हथियार, दीपक ने भी छह साथियों के साथ छोड़े हथियार
छत्तीसगढ़। बड़ी संख्या में बड़े नक्सल लीडरों के मारे जाने या आत्मसमर्पण करने के बाद नक्सलियों में दहशत पैठ गयी है। कब, कहां, कैसे मार दिये जाएंगे, इस बात से वे भी अनिश्चितता में आ गये हैं और जो जहां देख रहा है, वहीं आत्मसमर्पण कर रहा है। उत्तर बस्तर डीविजन में सक्रिय सीपीआईएम लीडर छत्तीसगढ़ में एक करोड़ के इनामी रामधेर मज्जी सहित 12 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इन नक्सलियों में छह महिलाएं भी शामिल हैं। इसके साथ ही बालाघाट में दीपक ने भी छह साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया।
रामधेर तीन प्रदेशों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की पुलिस के लिए बड़ी चुनौती था। यह कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दे चुका है। सरेंडर नक्सली रामधेर मज्जी एमएमसी जोन में सीसी मेंबर के रूप में कर रहा था।
सरेंडर करने वालों में रामधेर मज्जी ने एके-47 सहित बड़े कैडर शामिल हैं। इसके साथ ही सरेंडर करने वालों में सीसी मेंबर, डीवीसीएम, एसीएम और अन्य स्तर के बड़े नक्सली शामिल हैं। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में रामधेर मज्जी- सीसीएम, चंदू उसेंडी – डीवीसीएम, ललिता – डीवीसीएम , जानकी – डीवीसीएम , प्रेम –डीवीसीएम, रामसिंह दादा- एसीएम, सुकेश पोट्टम -एसीएम , लक्ष्मी- पीएम , शीला – पीएम , सागर -पीएम , कविता – पीएम , योगिता –पीएम हैं। बताया जा रहा है कि सीसी मेंबर रामधेर मज्जी के सरेंडर के बाद नक्सलियों का एमएमसी जोन लगभग खत्म हो गया।
एसपी ने कहा
बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने कहा कि इससे जिला लगभग नक्सल मुक्त हो गया। इस दौरान नक्सलियों ने कुल 12 हथियार सौंपे हैं, जिनमें दो एके -47, दो इंसास, एक एसएलआर, और दो .303 राइफलें है।
बालाघाट नक्सल से मुक्त
आज डीवीसीएम दीपक उर्फ सुधाकर ने भी अपने अन्य पांच साथियों के साथ बालाघाट में आत्मसमर्पण कर दिया। इसके साथ ही बालाघाट पूर्ण रूप से नक्सलमुक्त हो गया है। दीपक के साथ ही रोहित उर्फ मंगलू एससीएम, रोशन-एसीएम, सुभाष-एसीएम, रतन-एसीएम, रंजीत पीएम ने भी आत्मसमर्पण कर दिया है।
पहले 37 ने किया था आत्मसमर्पण
इससे पहले दंतेवाड़ा जिले में 37 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। मिनपा जैसी घटना में शामिल नक्सली ने अपने 36 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया था। इन सभी नक्सलियों के ऊपर 65 लाख का इनाम घोषित था। दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि पूना मारगेम जिसका अर्थ पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल पर भरोसा जताते हुए नक्सली हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति और प्रगति के मार्ग को अपना रहे हैं और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो रहे है।







