लखनऊ, 27 मई : लखनऊ के गोसाईगंज क्षेत्र में सिठौली पुल के पास इंदिरा नहर (जिसे शारदा नहर भी कहा जाता है) में हाल ही में एक दुर्लभ गंगा नदी डॉल्फिन (Platanista gangetica) के देखे जाने की खबर ने स्थानीय समुदाय और वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों ने इस असामान्य दृश्य का वीडियो बनाया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वन्यजीव संरक्षण विभाग को सूचना मिलने के बाद उनकी टीम मौके पर पहुंची और इस लुप्तप्राय प्रजाति की खोज और संरक्षण के प्रयास शुरू कर दिए। यह घटना न केवल वन्यजीव संरक्षण के महत्व को बताती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश की नदियों और नहरों में अभी भी जैव-विविधता बरकरार है।
बता दें कि इस दुर्लभ घटना को 26 मई, 2025 को, X पर @ZEEUPUK द्वारा पोस्ट किया गया जिसमें एक अपडेट के अनुसार, गोसाईगंज के सिठौली पुल के पास इंदिरा नहर में एक दुर्लभ डॉल्फिन देखी गई। स्थानीय लोगों ने इस डॉल्फिन को पानी की सतह पर तैरते और उछलते देखा, जिसके बाद उन्होंने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया, जिससे इस क्षेत्र में गंगा नदी डॉल्फिन की मौजूदगी पर ध्यान गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत वन्यजीव संरक्षण विभाग को सूचित किया, जिसके बाद विभाग की एक टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और डॉल्फिन की खोज शुरू की।
मालूम हो कि यह पहली बार नहीं है जब इंदिरा नहर में डॉल्फिन देखी गई हो। इससे पहले अक्टूबर 2024 में भी, इसी नहर में दो गंगा नदी से आयीं डॉल्फिन फंस गई थीं, जिनमें से एक को सफलतापूर्वक बचाया गया, जबकि दूसरी की मृत्यु हो गई थी। उस घटना में भी कम पानी के स्तर को डॉल्फिन के फंसने का कारण बताया गया था।
रेड लिस्ट में है डॉल्फिन
गंगा नदी डॉल्फिन, जिसे स्थानीय रूप से “सूस” या “शुशुक” भी कहा जाता है, भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है। यह प्रजाति गंगा, ब्रह्मपुत्र, घाघरा, और चंबल जैसी नदियों में पाई जाती है। उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या लगभग 2,000 से अधिक बताई जाती है, जो गंगा नदी बेसिन में मौजूद कुल 4,000 डॉल्फिन का आधा हिस्सा है। यह प्रजाति IUCN रेड लिस्ट में “लुप्तप्राय” (Endangered) की श्रेणी में है और भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत संरक्षित है।
गंगा नदी डॉल्फिन की खासियत यह है कि यह जन्म से अंधी होती है और सोनार (इकोलोकेशन) का उपयोग करके अपने शिकार (मछली और अन्य जलीय जीव) को ढूंढती है। ये गहरे पानी को पसंद करती हैं, लेकिन नहरों में कम पानी होने पर अक्सर फंस जाती हैं, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है।
वन्यजीव संरक्षण विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई की
सूचना मिलते ही वन्यजीव संरक्षण विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई शुरू की। उनकी प्राथमिकता इस डॉल्फिन को सुरक्षित रूप से गहरे पानी, जैसे घाघरा नदी, में स्थानांतरित करना है, जैसा कि अक्टूबर 2024 में एक बचाव अभियान के दौरान किया गया था। उस अभियान में, लखनऊ और बाराबंकी के वन कर्मियों ने तीन घंटे की मेहनत के बाद एक 7 फीट लंबी डॉल्फिन को बचाकर घाघरा नदी में छोड़ा था।
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. विपुल मौर्य, जो वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) से जुड़े हैं, ने बताया कि गंगा नदी डॉल्फिन उत्तर प्रदेश की घाघरा, चंबल, और गंगा नदियों में पाई जाती हैं। इंदिरा नहर, जो लखीमपुर खीरी से शुरू होकर रायबरेली और मिर्जापुर तक जाती है, डॉल्फिन के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। हालांकि, नहरों में कम पानी और प्रदूषण इस प्रजाति के लिए खतरा बन रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग को किया सूचित
सिठौली पुल के पास डॉल्फिन के दिखने की घटना ने स्थानीय लोगों में उत्साह के साथ-साथ जागरूकता भी पैदा की है। वीडियो के वायरल होने से न केवल इस दुर्लभ प्रजाति के बारे में चर्चा बढ़ी, बल्कि लोगों ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझा। स्थानीय लोगों ने तुरंत वन विभाग को सूचित करके एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाई।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डॉल्फिन को देखने के लिए भीड़ जमा करना या उनके साथ छेड़छाड़ करना उनके लिए हानिकारक हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, जनवरी 2023 में प्रतापगढ़ में कुछ युवकों ने शारदा नहर की एक सहायक नहर से 8 फीट लंबी डॉल्फिन को पकड़ा था, जिसे बाद में ग्रामीणों ने पानी में छोड़ दिया और विशेषज्ञों ने गंगा नदी में रिलीज किया। वहीं, 2021 में प्रतापगढ़ में ही एक गंगा नदी डॉल्फिन को स्थानीय लोगों द्वारा मार दिया गया था, जिसके बाद तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
डॉल्फिन के संरक्षण की हैं काफी चुनौतियां
नहरों में कम पानी: इंदिरा नहर में पानी का स्तर कम होना डॉल्फिन के फंसने का प्रमुख कारण है। विशेषज्ञों के अनुसार, नहरों में पानी का स्तर 9 फीट तक होना चाहिए ताकि डॉल्फिन सुरक्षित रह सकें।
- प्रदूषण और मानवीय गतिविधियां: नदियों और नहरों में बढ़ता प्रदूषण, मछली पकड़ने के जाल, और नदी यातायात डॉल्फिन के लिए खतरा हैं।
- जागरूकता की कमी: कई बार स्थानीय लोग अनजाने में डॉल्फिन को नुकसान पहुंचा देते हैं, जैसे कि मछली पकड़ने के जाल में फंसने पर उन्हें छुड़ाने के बजाय नुकसान पहुंचाना।
- बांध और बैराज: नदियों और नहरों पर बने बांध और बैराज डॉल्फिन के प्राकृतिक आवास को प्रभावित करते हैं, जिससे वे नहरों में प्रवेश कर फंस जाती हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
- नहरों में पानी का स्तर बढ़ाना: विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि नहरों में पानी का स्तर बढ़ाकर डॉल्फिन को फंसने से बचाया जा सकता है।
- जागरूकता अभियान: WWF-India और उत्तर प्रदेश वन विभाग ने मछुआरों और नदी-तटीय समुदायों के लिए जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए हैं, ताकि लोग डॉल्फिन की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार कदम उठाएं।
लखनऊ में डॉल्फिन का दिखना एक सकारात्मक संकेत है, जो दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश की नदियां और नहरें अभी भी इस लुप्तप्राय प्रजाति का घर हैं। यह जरूरी है कि हम इस प्रजाति को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करें, जिसमें जागरूकता, वैज्ञानिक अनुसंधान शामिल हों।







