संगीत नाटक अकादमी की प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिताएं सम्पन्न

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  • अस्मि मित्तल, मितुल शर्मा व शुभम केसरी प्रथम
  • देवांशी, आरुषि और राघवेन्द्र दूसरे स्थान पर

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अंतिम दिन आज स्टूडियो में निर्णायकों के समक्ष शास्त्रीय नृत्य कथक के प्रतिभागियों की क्लिप्स बड़ी टीवी स्क्रीन पर आईं। कोविड-19 के कारण विपिनखण्ड गोमतीनगर स्थित अकादमी भवन में प्रतियोगिताओं का दूसरा व अंतिम चरण प्रतियोगियों की रिकार्डेड क्लिप्स के आधार पर 10 जून से चल रहा था।

कथक बाल वर्ग में हरे-गुलाबी परिधान में ठुमरी- जो तुम मोरी बंहिया गहत हो…. व नृत्त पक्ष प्रस्तुत करने वाली सहारनपुर की अस्मि मित्तल को प्रथम चुना गया। दूसरे स्थान पर पीले वस्त्रों में पद रचना- मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो…. पर नृत्य प्रस्तुत करने वाली मेरठ संभाग की देवांशी यादव द्वितीय और तीन ताल पर सुंदर नृत्य पेश करने वाली लखनऊ संभाग की प्रियम यादव को तृतीय स्थान पर विजयी रहीं। बाल वर्ग के अन्य प्रतिभागियों में श्रेयांशी निषाद प्रयागराज, अनुष्का कास्तगीर वाराणसी, मृणाणिनी सहारनपुर, वेदांशी त्यागी मेरठ शामिल रहीं।

किशोर वर्ग में पीले कुर्ते में शिव वंदना से प्रारम्भ करके तीन ताल विलम्बित में उपज, गत, तिहाई, तराना व लड़ी पेश करने वाले विंध्याचल संभाग के मितुल शर्मा प्रथम आए। हरी वस्त्रों में उतरीं मेरठ की आरुषि नरूला द्वितीय रहीं जबकि, भूरे परिधान में प्रदर्शन करने वाली सहारनपुर की अवनि बालियान को निर्णायकों ने तृतीय स्थान दिया। मऊ के आशुतोष सिंह, प्रयागराज की निकिता चौरसिया व स्मृति गुप्ता, कृष्ण वंदना से आरम्भ करने वाली सहारनपुर की हर्षिता सैनी व धमार ताल पर नृत्य प्रस्तुत करने वाली मेरठ की प्रियांशी यादव किशोर वर्ग के अन्य प्रतिभागी रहे। कथक प्रतियोगिता के युवा वर्ग में शिव वंदना- नागेन्द्र हाराय… के साथ ही टुकड़े, तिहाई, परन, गत व तराना की प्रस्तुति करने वाले पीले कुरते में उतरे मऊ संभाग के शुभम केसरी पहले स्थान पर आए। दूसरे स्थान पर गुरु वंदना व अन्य रचनाएं प्रस्तुत करने वाले गोंडा के राघवेन्द्र प्रताप सिंह और तीसरे स्थान पर दर्शनीय कथक पेश करने वाली विंध्याचल संभाग की रिचा पाण्डेय रहीं।

युवा वर्ग में निकिता सिंह सहारनपुर, विदुषी जायसवाल वाराणसी, सागर विश्वकर्मा वाराणसी, ईप्सा नरूला मेरठ, उपासना जया विंध्याचल, राघव मोगा सहारनपुर और अनीता पाण्डेय प्रयागराज ने भी रिकार्डेड नृत्य में अपनी प्रतिभा दिखाई। कथक प्रतियोगिता में निर्णायकों का दायित्व लच्छू महाराज की शिष्या व वरिष्ठ कथक नृत्यांगना डा.कुमकुम धर, भातखण्डे संगीत संस्थान से सम्बद्ध कथक शिक्षिका डा.बीना सिंह व डा.मीरा दीक्षित ने निर्वाह किया।

प्रतियोगिताओं के अंत में अकादमी के सचिव तरुण राज ने आज के निर्णायकों के साथ ही सभी निर्णायकों और आयोजन में लगे सभी कर्मियों का आभार व्यक्त किया। इससे पहले आज सुबह निर्णायकों को पुष्पगुच्छ प्रदान कर स्वागत करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी सभी के सहयोग से यह आयोजन अंतिम चरणों में आ गया। उन्होंने इस बात पर भी खुशी व्यक्त की कि सीमित संसाधनों और विषम स्थितियों में अकादमी द्वारा संचालित की जा रही कथक कार्यशाला के साथ ही लोकसंगीत, रूपसज्जा व वाचन इत्यादि की कार्यशालाओं में बड़ी संख्या में कलाकार रुचिपूर्वक प्रतिभाग कर रहे हैं।

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