आज से करीब दो बरस पहले राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित ‘राजकमल चौधरी रचनावली’ के लोकार्पण के अवसर पर नामवर सिंह राजकमल चौधरी के कृतित्व पर कम, व्यक्तित्व पर अधिक बोलते हुए नजर आए थे।
नामवर सिंह ने राजकमल चौधरी को मशहूर शराबी बताया था।
लेकिन अब यह तथ्य भारतीय साहित्य संसार में कौन नहीं जानता कि 39 बरस से भी कम की आयु पाए राजकमल चौधरी की रचनावली मोटे-मोटे और मूल्यवान आठ खंडों में प्रकाशित हुई है, जबकि नामवर सिंह आज सूत्रों की मानें तो 91 बरस के हो गए, उनका काम एक लंबे अरसे से लिखना नहीं सिर्फ बकवास करना रहा है. इस बकवास को उनके शिष्य और अनुयायी एक जिल्द में करके राजकमल प्रकाशन से छपवाते रहे हैं।
अपने गुरु हजारीप्रसाद द्विवेदी से पहले साहित्य अकादेमी हड़पने वाले और बाद में इस प्रक्रिया को अपने भाई काशीनाथ सिंह के लिए भी जारी रखने वाले नामवर सिंह का अतीत योग्य रचनाकारों को हताश करने वाला रहा है
पुरस्कार-वापसी के वक्त का भी उनका पक्ष बहुत ‘अविस्मरणीय’ है।
यह कोई तुलना नहीं है, बस इस प्रसंग का फेर है कि राजकमल चौधरी को जितनी उम्र मिली, नामवर सिंह को उससे भी ज्यादा उम्र हो गई शराब पीते-पीते।
[ होश में न होने के निष्कर्ष ]







