पाप की कमाई से सौगातें

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पड़ते हैं जहां छापे
चौंधिया जाती हैं आंखे
मिलते हैं नोटों के जखीरे
गिनने के लिए लगानी
पड़ती हैं मशीनें
पता नहीं कैसे बना लेते है
इतने ठिकाने। चौधिया…
न जाने कितनी पीढ़ियों के लिए
जुटा लेना हैं चाहते
पाप की कमाई से सौगातें।
चौधिया जाती हैं आंखे…
– डॉ दिलीप अग्निहोत्री

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