मौलाना के फतवे बिके
हिन्दूवाद के झंडे बिके
पत्रकारों के कलम बिके
नेताओं की शरम बिके
मजहबी जज़्बात बिके
जातिवाद का श्राप बिके
नोटबंदी के घाव बिके
लाइन मे मरते इन्सान बिके
दादरी के अखलाक बिके
बाबरी के अहसास बिके
विकास के झासे बिके
राम मंदिर के वादे बिके
शरियत के तलाक बिके
घर वापसी-लव जेहाद बिके
एनआरएचएम जरायम बिके
जेल में लटके सचान बिके
मुजफ्फरनगर नरसंहार बिके
जवाहरबाग का काण्ड बिके
सत्तर साल बेहाल बिके
नेहरु पर इल्ज़ाम बिके
फिरकापरस्त मक्कार बिके
धर्मनिरपेक्षता से प्यार बिके
महिला का अपमान बिके
ठाकुर-दलित जज़्बात बिके
पेड खबर खूब तेज बिके
अखबारो के पेज बिके
प्राइम टाइम स्लाड बिके
टीवी न्यूज ईमान बिके
मरते गरीब-किसान बिके
दंगो में मरे इन्सान बिके
देशभक्ति के ढोंग बिके
भारतमाता जयघोष बिके
सर्जिकल स्ट्राइक का शौर्य बिके
भारत का वीर सपूत बिके
मोदी के महँगे सूट बिके
राहुल की फटी जेब बिके
माया का मुस्लिम कार्ड बिके
अखिलेश का अधूरा विकास बिके
अमित का जुमला वार बिके
साध्वी की गंदी जुबान बिके
खुशहाली के ख्वाब बिके
युवाओं के अहसास बिके
ब्राह्मण का सम्मान बिके
मुस्लिम का ईमान बिके
दलितों की फरियाद बिके
रोजगार की आस बिके
सुरक्षा का अरमान बिके
पिछड़ो का स्वाभिमान बिके…
– नवेद शिकोह







