राष्ट्र से बढ़कर मगर रोटी न होगी

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बात कड़वी हो भले, खोटी न होगी ।
नत हिमालय की कभी चोटी न होगी ।
भूख माना, ज़िन्दगी का सत्य कड़वा ,
राष्ट्र से बढ़कर मगर रोटी न होगी।

भावुक, आस्था की फ़सल से

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