तुम काटकर हमको कभी चैन से न रह पाओगे
मेरी बसी संस्कृति लोगों में तुमको खा जाएगी।
तुम करों जमकर राजनीति,
लेकिन देश तुमको सच में जानता हैं।
पहचानता हैं तुम्हारे मुखौटे को
आज नहीं तो कल तुम भी
काटकर गिरा दिए जाओगे।
लेकिन आज जो नुक्सान तुम मेरा कर रहे हो
दरअसल वह मेरा नहीं इस प्रकृति के साथ कर रहे हो।
मेरी शाखाओं में घरोंदा बनाएं इन बेजुबान पंछियों का कर रहे हो
उजाड़ रहे हो इनके आशियाने को, जो ईश्वर ने कहा था इनसे
आप इन्हीं घने वृक्षों की छाँव में आराम से रहियें।
आप इन्हीं प्रकृति की ठंडी छाँव में रहियें
अब मिटाने पर तुले हो इनकी और मेरी हस्ती
अपने चौमुखी विकास के नाम पर
अब सोच रखा है तो मिटा ही दोगे हमें।
वादा कर रहे हो आज, हमें काटकर पांच लगाओगे
विकास की खूब गंगा बहाओगे।
हम कटेंगे तो लोग आंसू भी बहाने आएंगे, हमें बचाने भी आएंगे
लेकिन दोस्त यादें रखना
हमें मिटाकर तुम भी कभी चैन से न रह पाओगे
आज नहीं तो कल तुम भी मिट जाओगे।
- sushil doshi, Cartoonist
https://youtu.be/xvSwTMjpQvo







