ऐ ज़िन्दगी आ बैठ कहीं चाय पीते हैं

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अंदाज ए बयां शेरों-ओ-शायरी का

ऐ ज़िन्दगी आ बैठ कहीं चाय पीते हैं… तू भी थक गई होगी मुझे भगाते भगाते…..


ख़ुद की ख्वाहिशें बिखर गयी हैँ… खामोशियाँ इस तरह मुझमेँ घर कर गयी हैँ….


फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझे रात भर रक्खा। कभी तकिया इधर रक्खा,कभी तकिया उधर रक्खा।। -अमीर


मेरी किस्मत में सबसे ज्यादा कुछ लिखा है तो बस इंतजार कुछ किस्मतने लिखा कुछ अपनों ने लिखा बेसुमार है बस उसी की भरमार है…..


जब कभी भी तुम्हारी उँगलियों के बीच के फ़ासले को मैंने अपनी उँगलियों से भरा है मुझे हर बार लगा हमने एक यात्रा पूरी की है… -गौरव भारती


उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा, आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा। -इफ़्तिख़ार नसीम


झुक कर सलाम करने में क्या हर्ज है मगर सर इतना मत झुकाओ कि दस्तार गिर पड़े- इक़बाल अज़ीम


तलाशी ले लो निगाहों की मेरी ख़ताओं का पता तुम्हें लग जाएगा बस एक तेरी तस्वीर छुपाई है मैंने दिल में उसके सिवा तुम्हें कुछ भी न मिल पाएगा

प्यार कहो या पागलपन, मोहब्बत कहो या नादानियां..!! तुम्हारे होने से ही तो है, हमारे दिल की ये बेचैनियां..!! – अजय बहादुर


दुनिया में सब का व्यवहार अलग होता है आंखें तो सबकी ही एक जैसी होती है….. पर सब का……देखने का अंदाज अलग होता है,……।।

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