एक ग़ज़ल:
ओ मन के मधुमास ! तुम्हारी चिन्ता है ।
शेष बचे विश्वास ! तुम्हारी चिन्ता है ।
आँसू पी – पीकर भी क्वांरी रह जाती ,
ओ अनब्याही प्यास ! तुम्हारी चिन्ता है ।
वक़्त मुट्ठियों की बालू है , भूल गये ,
भटक रहे अहसास ! तुम्हारी चिन्ता है ।
जीवन – कविता गुँथी श्रृंखला साँसों की ,
अर्थहीन अनुप्रास ! तुम्हारी चिन्ता है ।
पानी पीकर अपनी भूख मिटा लेता,
बच्चों के उपवास ! तुम्हारी चिन्ता है ।
- कमल किशोर ‘ भावुक







