Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, August 22
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग

    अपने बुजुर्गों की सेवा किसी वरदान से कम नहीं

    ShagunBy ShagunMay 31, 2026 ब्लॉग No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Serving one's elders is nothing short of a blessing.
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 161

    शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि जो व्यक्ति नित्य अपने बुजुर्गों की निष्काम सेवा में लीन रहता है, उसकी आयु, विद्या, यश और बल में निरंतर वृद्धि होती है, आज विज्ञान भी यही सिद्ध करता है…

    राहुल कुमार गुप्ता

    माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा केवल एक पारिवारिक दायित्व या नैतिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि यह उस शाश्वत जीवन-दर्शन की जीवंत धारा है जिसने सदियों से हमारी सनातन संस्कृति को सींचा है। आज की भागदौड़ भरी, अत्यधिक भौतिकवादी और करियर की अंधी दौड़ में अकुलाती आधुनिक जिंदगी में जहाँ हम अक्सर व्यक्तिगत स्पेस के भ्रामक सुख में अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं, वहाँ बुजुर्गों के आशीर्वाद की छांव ही हमें टूटने से बचा सकती है। ‘मातृदेवो भव, पितृदेवो भव’ का पावन उद्घोष केवल पत्थरों पर उकेरे जाने के लिए नहीं, बल्कि हमारे हृदय की धड़कनों में समाने के लिए है। जब हम अपने घर के वयोवृद्ध माता-पिता या दादा-दादी के पास बैठते हैं, तो हम केवल एक परंपरा का निर्वाह नहीं कर रहे होते, बल्कि हम ब्रह्मांड की उस सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ रहे होते हैं जो इस लोक के साथ-साथ परलोक के मार्ग को भी निष्कंटक और दैदीप्यमान बना देती है।

    शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि जो व्यक्ति नित्य अपने बुजुर्गों का अभिवादन करता है और उनकी निष्काम सेवा में लीन रहता है, उसकी आयु, विद्या, यश और बल में निरंतर वृद्धि होती है। जब भगवान श्रीगणेश जी ने संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा करने की प्रतिस्पर्धा में केवल अपने माता-पिता शिव-पार्वती की परिक्रमा की, तो उन्होंने युगों-युगों के लिए यह अकाट्य सत्य स्थापित कर दिया कि माता-पिता के चरणों में ही सारे तीर्थ, सारे लोक और संपूर्ण सृष्टि का रहस्य समाहित है। श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी बिना किसी संशय के माता-पिता की आज्ञा और सेवा को सर्वोपरि कल्याणकारी माना है। इस लोक में मिलने वाली मानसिक शांति और पारिवारिक समृद्धि वास्तव में उसी पितृ-ऋण से मुक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसे चुकाने का प्रयास हर संस्कारी संतान को करना चाहिए। इस पावन सेवा से उत्पन्न होने वाली आध्यात्मिक तरंगें हमारे संचित पापों का क्षय करती हैं, जिससे आत्मा निर्मल होती है और मृत्यु के पश्चात परलोक में परम गति सुनिश्चित होती है।

    इस सेवा भाव का एक अत्यंत गहरा और विस्मयकारी पहलू इसका वैज्ञानिक और चिकित्सकीय विज्ञान है, जो केवल सेवा पाने वाले बुजुर्गों को ही नहीं, बल्कि सेवा करने वाली संतान को भी शारीरिक और मानसिक रूप से पुनर्जीवित कर देता है। चिकित्सा विज्ञान कहता है कि जब कोई बेटा या बेटी अपने थके-हारे माता-पिता के पैर दबाता है, उनके सिर या शरीर की तेल से मालिश करता है, तो वहाँ एक अद्भुत द्वि-मार्गी हीलिंग और स्पर्श का विज्ञान काम कर रहा होता है। बुजुर्गों का शरीर ढलती उम्र के साथ वात प्रधान हो जाता है, धमनियां कमजोर होने लगती हैं और पैरों के अंतिम हिस्सों तक रक्त का संचार धीमा पड़ जाता है, जिससे उनके पैरों में हमेशा दर्द, जकड़न और सूजन बनी रहती है।

    जब हम स्नेहपूर्वक उनके पैर दबाते हैं, तो रक्त वाहिकाएं चौड़ी होती हैं और रक्त का प्रवाह सुचारू हो जाता है, जिससे उन्हें दर्द से तत्काल मुक्ति मिलती है। यही नहीं, हमारे पैर के तलवों और हथेलियों में पूरे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों के रिफ्लेक्सोलॉजी और एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं। जब हमारे हाथ उन अंगों को दबाते हैं, तो अनजाने में ही बुजुर्गों के मस्तिष्क, पाचन तंत्र और हृदय प्रणाली को नया जीवन मिल रहा होता है, जिससे उनकी नींद की गुणवत्ता सुधरती है और वे बुढ़ापे के अकेलेपन तथा डिमेंशिया जैसी भूलने की त्रासद बीमारियों से बचे रहते हैं।Serving one's elders is nothing short of a blessing.

    परंतु इस सेवा की सबसे चमत्कारी परिणति उस संतान के अपने शरीर और मन पर होती है जो यह सेवा कर रही है। आधुनिक न्यूरोलॉजी और एंडोक्रिनोलॉजी के शोध बताते हैं कि जब हम अपने पूजनीय बुजुर्गों को अत्यंत आदर और प्रेम से स्पर्श करते हैं, उनकी मालिश करते हैं या उनके अंगों को सहलाते हैं, तो सेवा करने वाले व्यक्ति के भीतर भी ऑक्सीटोसिन और डोपामाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर, जिन्हें लव और हैप्पीनेस हार्मोन कहा जाता है, तीव्र गति से स्रावित होने लगते हैं। इसके साथ ही, हमारे शरीर में दिनभर की भागदौड़ और मानसिक तनाव से पैदा होने वाला घातक स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल अचानक से गिर जाता है। यह एक प्रामाणिक वैज्ञानिक सत्य है कि दूसरों को शारीरिक आराम पहुंचाने की मानसिक तुष्टि हमारे अपने मस्तिष्क में एंडोर्फिन का स्तर बढ़ा देती है, जो प्रकृति का सबसे शक्तिशाली और सुरक्षित दर्द निवारक है।

    अर्थात, जब आप अपने माता-पिता के पैर दबाकर उनकी थकान मिटा रहे होते हैं, ठीक उसी क्षण आपके अपने शरीर का रक्तचाप नियंत्रित हो रहा होता है, हृदय के रक्त संचरण की प्रक्रिया बेहतर होती है। अपनी खुद की मानसिक एंग्जायटी और डिप्रेशन की जकड़न ढीली पड़ रही होती है और खुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) मजबूत हो रही होती है। साथ सेवा करने वाले की वात दोष की प्रवृत्ति में कमी भी आती है। प्रकृति का यह कितना अनूठा नियम है कि आप किसी और के दर्द को सहलाते हैं और दवा आपके अपने अंतर्मन को लग जाती है।

    मनोवैज्ञानिक और सामाजिक स्तर पर भी यह सेवा एक सुदृढ़ सुरक्षा कवच का निर्माण करती है। आज की युवा पीढ़ी जिस गहरे अकेलेपन, असुरक्षा और मानसिक भटकाव का सामना कर रही है, उसकी एकमात्र अचूक दवा बुजुर्गों का सानिध्य है। बुजुर्ग केवल श्वेत बालों वाले कमजोर वृद्ध नहीं हैं, वे अनुभवों के वह जीवंत और अमूल्य पुस्तकालय हैं जिनके पास जीवन के हर संकट, हर असफलता से उबरने की अचूक नीतियां और धैर्य का खजाना होता है। जब हम उनकी सेवा करते हुए उनके पास बैठते हैं, तो हमारे भीतर कृतज्ञता का भाव जागृत होता है। मनोविज्ञान मानता है कि कृतज्ञ रहने वाला व्यक्ति कभी अवसादग्रस्त नहीं हो सकता। इसके अलावा, हमारे घर का यह कौटुंबिक ताना-बाना हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए एक मूक पाठशाला बन जाता है। बच्चे वही नहीं सीखते जो हम उन्हें उपदेश देकर सिखाते हैं, बल्कि वे वही दोहराते हैं जो वे हमें अपने दादा-दादी या माता-पिता के साथ करते हुए देखते हैं। आज यदि हम अपने माता-पिता के चरणों में झुकेंगे, तो कल हमारी संतानें हमारे सम्मान में खड़ी होंगी। जिस समाज में बुजुर्गों की आंखों में आंसू की जगह आशीष के आंसू होते हैं, उस समाज का नैतिक पतन कभी नहीं हो सकता और वहाँ ओल्ड एज होम्स जैसी विसंगतियों के लिए कोई स्थान नहीं बचता।Serving one's elders is nothing short of a blessing.

    यह संपूर्ण प्रक्रिया प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभों का एक ऐसा चक्र है जो समाज को संजीवनी प्रदान करता है। प्रत्यक्ष रूप से जहाँ बुजुर्गों को शारीरिक कष्टों से राहत और मानसिक संबल मिलता है, वहीं अप्रत्यक्ष रूप से सेवा करने वाले को एक गहरी आत्मिक संतुष्टि, मानसिक शांति और तनावमुक्त जीवन का वरदान प्राप्त होता है। यह एक ऐसा निवेश है जिसका लाभांश हमें इसी लोक में उत्तम स्वास्थ्य, पारिवारिक सद्भाव और यश के रूप में मिलता है। साथ ही यह निवेश हमारी आत्मा पर चढ़े कर्मों के मैल को धोकर परलोक के उच्चतम सोपानों तक ले जाता है।

    आज की इस युवा और आधुनिक पीढ़ी से यह एक संवेदनशील और आत्मीय आह्वान है कि अपनी अति-व्यस्त दिनचर्या, लैपटॉप की स्क्रीन और आभासी दुनिया से कुछ पल चुराकर अपने घर के उस कोने में जरूर जाएं जहाँ इतिहास सांस ले रहा है। उन थके हुए कांपते हाथों को अपने हाथों में थामें, उनके पैरों की धूल को माथे से लगाएं और कुछ पल उनकी मालिश करते हुए, उनके पैरों को दबाते हुए बिताएं। जब उनकी झुकी हुई कमर और धुंधलाती आंखों से आपके लिए अंतरात्मा की गहराइयों से मूक दुआएं निकलेंगी, तो ब्रह्मांड की कोई भी शक्ति आपको पराजित नहीं कर पाएगी। उनकी सेवा में बिताया गया वह एक पल किसी भी आलीशान कॉर्पोरेट ऑफिस के केबिन या महंगे हीलिंग थेरेपी सेंटर से हजार गुना अधिक सुकून और चिकित्सकीय स्वास्थ्य देने वाला होगा। क्यों न हम अपनी इस अनमोल पुरातन नीति और संस्कारों की ओर लौटें, क्योंकि माता-पिता के चरणों की सेवा ही इस धरा का सबसे बड़ा धर्म है, सबसे बड़ा मनोविज्ञान है और मोक्ष का सबसे पावन व सुलभ मार्ग है।

    Shagun

    Keep Reading

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    'Take 5 lakhs, just save my brother...' Kanwariya swept away by the Ganga's strong current; brother stood on the bank, pleading desperately.

    ‘5 लाख ले लो, बस मेरे भाई को बचा लो…’ गंगा की तेज धार में बह गया कांवड़िया, किनारे खड़ा भाई गिड़गिड़ाता रहा

    Iron rod pierces 3-year-old Kartik’s head; private hospital demanded ₹15 lakh... KGMU doctor saved his life for just ₹25,000.

    3 साल के कार्तिक के सिर में घुसी लोहे की रॉड, निजी अस्पताल ने मांगे 15 लाख… KGMU के डॉक्टर ने सिर्फ 25 हजार में बचाई जान

    Maa Khaira Bhavani had appeared in the form of a divine beam of light.

    ज्योति पुंज के रूप में प्रकट हुईं थीं माँ खैरा भवानी

    People grappling with the unending problem of adulteration.

    मिलावट की अंतहीन समस्या से झूझते लोग

    Lost a leg, but not the spirit! Undertaking the Kanwar Yatra with a prosthetic leg.

    एक पैर गंवाया, हौसला नहीं! कृत्रिम पैर से कर रहे हैं कांवड़ यात्रा

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Ayushmann Khurrana's visit to Jalna A message of child safety and a secure childhood.

    आयुष्मान खुराना की जालना यात्रा : बच्चों की सुरक्षा और सुरक्षित बचपन का संदेश

    August 21, 2026
    Slapped for not doing homework, 6-year-old child dies in the classroom.

    होमवर्क न करने पर थप्पड़, कक्षा में ही 6 साल के बच्चे की मौत

    August 21, 2026
    Insistence on a mobile phone leads to family tragedy; three die after falling from a hill in Chhatrapati Sambhajinagar.

    मोबाइल की जिद में उजड़ा पूरा परिवार, छत्रपति संभाजीनगर की पहाड़ी से गिरकर तीन मौतें

    August 21, 2026
    A spine-chilling, mysterious incident on the stairs in Ghaziabad: A person riding a cat or a black buffalo?

    गाजियाबाद में सीढ़ियों पर रोंगटे खड़े कर देने वाली रहस्यमयी घटना: बिल्ली या काले भैंसे पर सवार व्यक्ति?

    August 21, 2026
    Play ‘Ghar Ki Murgi’ staged in Lucknow

    लखनऊ में नाटक ‘घर की मुर्गी’ का मंचन

    August 21, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading