अरब देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री

कुछ दिन पहले ही संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया था। इनका कहना था कि नरेंद्र मोदी के प्रयासों से भारत और अरब देशों के बीच संबंधों को मजबूती मिली है। आपसी सहयोग का आधार व्यापक हुआ है। पिछले कुछ समय में ही अरब देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी भी आगे बढ़ी है। संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के बाद नरेंद्र मोदी सऊदी अरब की यात्रा पर गए थे। दोनों देशों के साथ अनेक समझौते हुए। कुछ समय पहले सऊदी अरब के पाकिस्तान के साथ रिश्ते बहुत मजबूत थे। लेकिन अब सऊदी अरब ने साफ किया कि भारत की कीमत पर किसी देश से दोस्ती नहीं कि जा सकती।

दोनों देशों के बीच पेट्रोलियम, रक्षा एवं नागर विमानन समेत विभिन्न क्षेत्रों में बारह समझौते किए गए। नरेंद्र मोदी रियाद में तीसरे फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनीशिएटिव फोरम के सत्र में शामिल हुए। इसके अलावा सुल्तान सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद से उनकी उपयोगी वार्ता हुई। दोनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते से सामरिक क्षेत्र का नया अध्याय शुरू होगा। इसके अलावा हवाई सेवा,दवा व अन्य मेडिकल उत्पाद, पेट्रोलियम क्षेत्र में सऊदी कंपनी अरामको कॉरपोरेशन के साथ समझौते हुए। स्टॉक एक्सचेंज, हज से जुड़े सहयोग, और रुपये कार्ड को लेकर करार हुआ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री अब्दुल अजीज बिन सलमान अल से वार्ता हुई। ऊर्जा क्षेत्र में आपसी संबंध बढ़ाने का निर्णय हुआ। पर्यावरण, जल और कृषि मंत्री अब्दुल-रहमान बिन अब्दुलमोहसिन अल फजली से भी मोदी की मुलाकात उपयोगी रही। नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के इन्वेस्टमेंट इनीशिएटिव फोरम में कहा कि भारत को पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में प्रयास किये जा रहे है। दो हजार चौबीस तक यह लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। भारत में वैश्विक निवेशकों के लिए बढ़ते व्यापार और निवेश के अपर अवसर है। भारत में एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य वाले यूनिकॉर्न की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वैश्विक निवेश के लिए अनुकूलता है। ईज ऑफ डूइंग में भारत का ग्राफ ऊंचा हुआ है। साऊदी अरब भी इसमें भारत का सहयोगी है।

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