नई दिल्ली, 28 जुलाई, 2021: Koo (कू) पर एक पीला टिक भारतीय जीवन में यूज़र्स की प्रतिष्ठा, कद, उपलब्धियों, क्षमताओं और पेशेवर स्थिति को पहचानता है और उसका जश्न मनाता है। इसका तात्पर्य है कि यूज़र चाहे- एक कलाकार, विद्वान, खिलाड़ी, राजनेता, व्यवसायी या किसी अन्य क्षेत्र में हो, उसको भारतीय ढाँचे में सम्मानित माना जाता है।
Koo (कू) मंच पर मौजूद सभी लोगों का स्वागत करता है जो कू में एमिनेंस जो कि येलो टिक के नाम से जाना जाता है, के लिए आवेदन देना चाहते है। रिक्वेस्ट फॉर एमिनेंस का मूल्यांकन आंतरिक शोध, तीसरे पक्ष के सार्वजनिक संसाधनों और भारतीय संदर्भ में किया जाता है। प्रत्येक वर्ष मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर में कू में एक विशेष टीम द्वारा प्रतिष्ठा मानदंडों की समीक्षा की जाती है। आज तक, प्राप्त अनुरोधों के लगभग एक प्रतिशत के लिए एमिनेंस येलो टिक की पुष्टि की गई है और इन प्रतिष्ठित आवाजों को उनके संबंधित भाषा कम्युनिटी में प्रमुखता दी जाती है। कू यह सुनिश्चित करता है कि एमिनेंस का दुरुपयोग ना हो और ना ही यह इच्छा के अनूरूप किसी को प्रदान किया जाए।
एमिनेंस के मानदंडों पर प्रकाश डालते हुए, कू के सह-संस्थापक और सीईओ, अप्रमेय राधाकृष्ण ने कहा, “कू एमिनेंस टिक एक मान्यता है कि यूज़र भारत और भारतीयों की आवाज़ का एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि है। हमने भारत की स्थानीय वास्तविकताओं को मद्देनज़र रखते हुए एक ऐसी प्रकिया तैयार की है और हम पारदर्शिता का ख़्याल रखते हुए एक सत्यापित और ऑनलाइन बातचीत करते हुए ज़िम्मेदारी से कार्य करने वाले यूज़र बेस को बनाये रखने के लिए प्रतिबद्ध है।”
Koo (कू) ऐप के सह-संस्थापक मयंक बिदावतका कहते हैं, “ हमें गर्व है कि कू ने एमिनेंस को सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराने के लिए अपना एक मानदंड बनाया है। चूंकि एमिनेंस का मूल्यांकन भारतीय संदर्भ में किया जाता है, इसलिए यह भारतीयों को येलो टिक प्राप्त करने में सक्षम होने की बेहतर संभावना देता है। डिजिटल बातचीत को दिलचस्प और रचनात्मक बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।








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