इस विश्व कप ने भारतीय क्रिकेट की दशा और दिशा बदल कर रखी दी। पिछले दो विश्व कप में महज एक जीत दर्ज करने वाली भारतीय टीम ने कपिल देव के नेतृत्व में इस बार ऐसा करिश्माई प्रदर्शन किया कि चैंपियन ही बन बैठी। फाइनल मुकाबले में दो बार की विश्व चैंपियन वेस्ट इंडीज को 183 रन का लक्ष्य भी हासिल नहीं करने दिया और मैच 40 रन से जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया। खास बात यह रही कि भारतीय टीम ने अपने पहले ही ग्रुप मैच में वेस्ट इंडीज को 34 रन से हराकर शानदार शुरुआत की। इसके बाद भारत ने आस्ट्रेलिया और जिम्बाब्वे को भी मात दी।
भारत ने छह में से चार मैच जीत कर 16 अंक लेकर ग्रुप में नंबर दो पर रहा और वेस्ट इंडीज के साथ सेमी फाइनल में पहुंचने का गौरव हासिल किया। सेमीफाइनल में भारतीय टीम का मुकबला मेजबान इंग्लैंड से हुआ। कपिल देव, रोजर बिन्नी और मोहिंदर अमरनाथ की शानदार गेंदबाज़ी के कारण भारत ने इंग्लैंड को 213 रन पर ही समेट दिया। फिर अमरनाथ, यशपाल शर्मा और संदीप पाटिल ने शानदार बल्लेबाज़ी कर भारत को 55वें ओवर में ही चार विकेट के नुक़सान पर जीत दिला दी।
फाइनल में मुकाबला दो बार की चैंपियन वेस्ट इंडीज से था। वेस्ट इंडीज ने भारत को सिर्फ 183 रन पर समेट दिया। लेकिन भारतीय गेंदबाजों और फील्डरों ने जी जान लगा दी। मोहिंदर अरमनाथ और मदन लाल ने शानदार गेंदबाज़ी की और मैच का पासा ही पलट दिया। वेस्ट इंडीज की पूरी टीम 140 रन बनाकर आउट हो गई और भारत पहली बार विश्व कप का विजेता बन गया। इस विश्व में कप कपिल देव की 175 रन की नाबाद करिश्माई पारी को हमेशा याद किया जाता है। जो उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ ऐसे समय पर खेल जब भारतीय टीम ने महज 17 रन पर पांच विकेट खो दिए थे। इसके बाद कपिल देव ने रोजर बिन्नी (22) के साथ 60 रन, मदनलाल (17) के साथ (62) और सैयद किरमानी (24 ना.) के साथ 126 रन की साझेदारी की टीम का स्कोर 266 रन पहुंचाया।

कपिल देव ने अपनी पारी के दौरान 138 गेंदों का सामना किया जिसमें उन्होंने 16 चौके और छह छक्के जड़े। कपिल देव ने टूर्नामेंट भारत की और से सर्वाधिक 303 रन बनाए। जबकि रोजर बिन्नी 18 विकेट लेकर टूर्नामेंट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे। मनदलाल ने भी 17 विकेट अपनी झोली में डाले। लगातार तीसरी बार विश्व का आयोजन इंग्लैंड ही हुआ पर इस बार टूर्नामेंट में कई बदलाव दिए गए थे। आठ टीमों को चार-चार के दो ग्रुप में बांटा गया। प्रत्येक टीम को अपने ग्रुप में हर टीम से दो-दो मैच खेलने थे। इसी विश्व कप में पहली बार 30 यार्ड सर्किल का प्रयोग किया गया। जिसके तहत इस घेरे के अंदर हर समय कम से कम चार क्षेत्ररक्षक खिलाड़ी होने चाहिए। वाइड और बाउंसर गेंदों के लिए भी नियम कड़े किए गए।
इस विश्व कप ने भारतीय क्रि केट की दशा और दिशा बदल कर रखी दी। पिछले दो विश्व कप में महज एक जीत दर्ज करने वाली भारतीय टीम ने कपिल देव के नेतृत्व में इस बार ऐसा करिश्माई प्रदर्शन किया कि चैंपियन ही बन बैठी। फाइनल मुकाबले में दो बार की विश्व चैंपियन वेस्ट इंडीज को 183 रन का लक्ष्य भी हासिल नहीं करने दिया और मैच 40 रन से जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया। खास बात यह रही कि भारतीय टीम ने अपने पहले ही ग्रुप मैच में वेस्ट इंडीज को 34 रन से हराकर शानदार शुरुआत की। इसके बाद भारत ने आस्ट्रेलिया और जिम्बाब्वे को भी मात दी। भारत ने छह में से चार मैच जीत कर 16 अंक लेकर ग्रुप में नंबर दो पर रहा और वेस्ट इंडीज के साथ सेमीफाइनल में पहुंचने का गौरव हासिल किया। सेमीफाइनल में भारतीय टीम का मुकबला मेजबान इंग्लैंड से हुआ।
कपिल देव, रोजर बिन्नी और मोहिंदर अमरनाथ की शानदार गेंदबाज़ी के कारण भारत ने इंग्लैंड को 213 रन पर ही समेट दिया। फिर अमरनाथ, यशपाल शर्मा और संदीप पाटिल ने शानदार बल्लेबाज़ी कर भारत को 55वें ओवर में ही चार विकेट के नुक़सान पर जीत दिला दी। फाइनल में मुकाबला दो बार की चैंपियन वेस्ट इंडीज से था। वेस्ट इंडीज ने भारत को सिर्फ 183 रन पर समेट दिया। लेकिन भारतीय गेंदबाजों और फील्डरों ने जी जान लगा दी। मोहिंदर अरमनाथ और मदन लाल ने शानदार गेंदबाज़ी की और मैच का पासा ही पलट दिया। वेस्ट इंडीज की पूरी टीम 140 रन बनाकर आउट हो गई और भारत पहली बार विश्व कप का विजेता बन गया।
इस विश्व में कप कपिल देव की 175 रन की नाबाद करिश्माई पारी को हमेशा याद किया जाता है। जो उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ ऐसे समय पर खेल जब भारतीय टीम ने महज 17 रन पर पांच विकेट खो दिए थे। इसके बाद कपिल देव ने रोजर बिन्नी (22) के साथ 60 रन, मदनलाल (17) के साथ (62) और सैयद किरमानी (24 ना.) के साथ 126 रन की साझेदारी की टीम का स्कोर 266 रन पहुंचाया। कपिल देव ने अपनी पारी के दौरान 138 गेंदों का सामना किया जिसमें उन्होंने 16 चौके और छह छक्के जड़े।
कपिल देव ने टूर्नामेंट भारत की और से सर्वाधिक 303 रन बनाए। जबकि रोजर बिन्नी 18 विकेट लेकर टूर्नामेंट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे। मनदलाल ने भी 17 विकेट अपनी झोली में डाले। लगातार तीसरी बार विश्व का आयोजन इंग्लैंड ही हुआ पर इस बार टूर्नामेंट में कई बदलाव दिए गए थे। आठ टीमों को चार-चार के दो ग्रुप में बांटा गया। प्रत्येक टीम को अपने ग्रुप में हर टीम से दो-दो मैच खेलने थे। इसी विश्व कप में पहली बार 30 यार्ड सर्किल का प्रयोग किया गया। जिसके तहत इस घेरे के अंदर हर समय कम से कम चार क्षेत्ररक्षक खिलाड़ी होने चाहिए। वाइड और बाउंसर गेंदों के लिए भी नियम कड़े किए गए।
चैंपियन – भारत
देश – आठ
मेजबान – इंग्लैंड
मैच – 60 ओवर







