टीवी के पर्दें पर भगवान राम जी की सर्वश्रेस्ठ भूमिका निभा कर सर्वाधिक लोकप्रियता पाने वाले कलाकार अरुण गोविल जी आज भी सोशल एक्टिव हैं और उन्होंने आज भी अपने फैंस और लोगों को अपनी शिक्षाप्रद बातों से सम्मोहित कर रखा हैं लोग उनकी शिक्षाप्रद बाते पढ़कर आत्मसात करते हैं और अपने जीवन में प्रेरणा स्रोत लेकर पालन करते हैं इसके साथ ही लोग अपने परिवार के बीच इस संस्कार रूपी बातों को आदान- प्रदान कर उन्हें फालों करने की प्रेरणा देते हैं। यह बातें इतनी पावरफुल हैं कि आपके जीवन को बदल कर रख देंगी और चाहे तो इसे पढ़कर इन बातों को अमल में ले लें तो वास्तव में जीवन को सही मार्गदर्शन मिल सकता है।

आज अभिनेता अरुण गोविल की लोकप्रियता इतनी हैं कि ट्विटर पर उनके फॉलोवर्स की संख्या 517.8K हैं इसके साथ ही इंस्टाग्राम पर 390k फॉलोवर्स की संख्या है।
बता दें कि एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि मैंने फिल्मों में बहुत सारी भूमिकाएं अदा की लेकिन रामानंद सागर कृत रामायण में जब से मैंने राम कि भूमिका अदा कि तब से मेरे जींवन में बहुत बदलाव आया मैंने सारे ऐब छोड़ दिए और फिर मैंने भगवान राम की आध्यात्मिक शक्ति को पहचाना और उनकी प्रेरणा से अपने जीवन में सफल हो पाया। तो आइये हम सभी आत्मसात करते हैं उनकी अच्छी बातों को –
“आज से बेहतर कुछ भी नहीं, क्योंकि कल कभी आता नहीं और आज कभी जाता नहीं
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“जब आप ऊँचाइयों की सीढ़ियाँ चढ़ रहे हों तो पीछे छूटे लोगों से बहुत अच्छा व्यवहार करें, क्योंकि उतरते समय वही लोग आपको रास्ते में फिर मिलेंगे” ।
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मिल बांट कर खाने का यह गुण तो ईश्वर ने सबको दिया था… पता नहीं इंसानों ने अपना यह गुण कहां खो दिया… ।
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कोहरे से एक अच्छी बात सीखने को मिलती है कि जब जीवन में रास्ता न दिखाई दे रहा हो तो बहुत दूर तक देखने की कोशिश व्यर्थ है। संभल कर एक – एक कदम चलते चलें तो मंजिल मिल जाएगी।
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“किसी बच्चे को उपहार ना दिए जाएँ तो वो थोड़ी देर रोएगा, और अगर संस्कार ना दिए जाएँ तो जीवन भर रोएगा”।
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“भगवान से भी बड़े माता पिता होते हैं, क्योंकि भगवान सुख दुःख दोनों देते हैं परंतु माता पिता सिर्फ़ सुख देते हैं”
………………………………………………………………………………………….इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में किताबी ज्ञान जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है बच्चों को इंसानियत, दया, करुणा एवं दूसरों की मदद की शिक्षा देना. अपने बच्चों के हृदय में ये संस्कार ज़रूर डालें. …………………………………………………………………………………………
हर रोज़ गिरकर भी,
मुक़म्मल खड़े हैं…!
ऐ ज़िंदगी देख,
मेरे हौसले तुझसे भी बड़े हैं …!!
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कौन हिसाब रखे
किसको कितना दिया
और किसने कितना बचाया
इसलिए ईश्वर ने आसान गणित लगाया
सबको खाली हाथ भेज दिया
खाली हाथ ही बुला लिया।
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कठिन समय में समझदार व्यक्ति रास्ता खोजता है, और कमज़ोर व्यक्ति बहाना” ।
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‘मन में उतरना’ और ‘मन से उतरना’ केवल आपके व्यवहार पर निर्भर करता है..!
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“इंसान एक दुकान है, और ज़ुबान उसका ताला, ताला खुलता है, तभी मालूम चलता है कि दुकान सोने की है या कोयले की”।
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दुनिया के रैन बसेरे में पता नहीं कितने दिन रहना है,
सबके दिलों को जीत लो, यही जीवन का गहना है”।
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जीवन एक ऐसा रंगमंच है, जहां किरदार को खुद नहीं पता होता, कि अगला दृश्य क्या होगा..!
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“अपने जीवन की तुलना किसी के साथ नहीं करनी चाहिए..!‘सूर्य’ और ‘चंद्रमा’ के बीच कोई तुलना नहीं, जब जिसका वक़्त आता है तब वो चमकता है’।
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“मुँह के घाव सबसे जल्दी भरते हैं, मुँह से बोले गए शब्दों के घाव सबसे ज़्यादा देर में भरते हैं”।
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“होने वाले खुद ही ‘अपने’ हो जाते हैं, किसी को कहकर ‘अपना’ बनाया नहीं जाता”।
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बहुत दूर तक जाना पड़ता है सिर्फ़ यह जानने के लिए कि नज़दीक कौन है..!
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वाणी और विचार.. ये दोनों प्रोडक्ट आपकी अपनी कंपनी के हैं.।
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जितनी क्वालिटी और गुणवत्ता
अच्छी रखेंगे…उतनी कीमत ज्यादा मिलेगी..।
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“ज़िंदगी की रेस में जो लोग आपको ‘दौड़कर’ नहीं हरा पाते, वही आपको ‘तोड़कर’ हराने की कोशिश करते हैं”।
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“रिश्तों में झुकना ग़लत नहीं है, सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए”
- प्रस्तुति: सुशील कुमार








1 Comment
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