लखनऊ। सरोजनीनगर में बीती शनिवार को दिनदहाड़े गोलियों से भूने गए शराब माफिया विनोद सिंह हत्याकांड मामले में राजधानी पुलिस नाकाम साबित हो रही है। शायद इसीलिए मामले की छानबीन के लिए एसटीएफ को जिम्मेदारी सौंपी गयी है। वो अपने स्तर से जांच-पड़ताल कर रही है। जानकारों की माने तो विनोद के विरोधी रहे तस्कर घटना के बाद से यूपी छोड़ चुके हैं, जबकि नामजद आरोपियों ने गैर जनपद में रिश्तेदारों के घर ठिकाना बनाया है। आशंका जतायी जा रही है कि कारोबार के वर्चस्व में काफी दिनों से तस्करों के बीच छिड़ी जंग में विनोद को मौत के घाट उतारा गया है। उधर पुलिस नामजद आरोपियों व राडार पर आए तस्करों के गिरफ्त में आने के बाद ही कुछ कहने को तैयार है।
बताते चलें कि शनिवार सरेशाम जब विनोद कार से सरोजनीनगर इलाके में एक शराब ठेके के पास पहुंचा था तभी उसे गोलियों से भूना गया था। बाद में उसकी पत्नी ने तीन लोगों को नामजद किया था। बताया जाता है कि तस्कर शंकर से विनोद की काफी दिनों से वर्चस्व को लेकर लड़ाई चल रही थी। हरियाणा से शंकर की तस्करी कर राजधानी लायी गयी शराब को कई बार विनोद पुलिस की मद्द से पकड़वा चुके थे। इस बार उसने बंथरा पुलिस से मुखबिरी कर विनोद की लाखों की रुपए की शराब पकड़वायी थी। दोनों के बीच इसी को लेकर रंजिश थी। बताया जाता है कि शराब बरामदगी के बाद शंकर व विनोद की हॉट-टॉक हुयी थी। जहां उसने सब सिखाने की धमकी दी थी। उसकी धमकी के बाद भी विनोद की सरेआम हत्या कर दी गयी। इस हत्याकांड में शंकर व उनके पार्टनर रहे विनोद जायसवाल का नाम सामने आया लेकिन मृतक की पत्नी ने तीन अन्य लोगों को नामजद करा दिया, पर पुलिस घटना के पांच दिन बाद भी न तो नामजद आरोपियों को छू सकी और न ही राडार पर आए शराब माफियाओं का सुराग लगा सकी। खाकी की इसी नाकाम के बाद आला अफसरों ने हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने का जिम्मा एसटीएफ को सौंप दिया।







