जी के चक्रवर्ती
वैसे तो कहने को किसी के आने जाने से क्या फर्क पड़ता है? लेकिन समय गुजरने के बाद यह कहना पड़ता है कि फर्क तो पड़ता है भाई। देश के उत्तर प्रदेश राज्य में 2022 में होने वाले चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही विभिन्न राजनीतिक दलों में उथल-पुथल का दौर शुरू हो गया है। इस उथल-पुथल में बीजेपी से लेकर कांग्रेस, सपा जैसे सभी पार्टियो के नेताओं का दलबदल इधर से उधर का कार्यक्रम जोरो पर हैं। जिसकी शुरुआत करते हुए सबसे पहले स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा का दामन ठीक उसी तरह से छोड़ा है जिस तरह वर्ष 2017 में हुए चुनाव से ठीक पहले बहुजन समाज पार्टी को छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था ठीक वैसे ही अब मतदान की तारीखों के घोषणा होते ही मौर्य ने भाजपा का दामन छोड़ कर सपा के पाले में जा खड़े हुये हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्य के भारतीय जनता पार्टी छोड़ के जाना बीजेपी के लिए एक बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि स्वामी प्रसाद मौर्य योगी सरकार में मंत्री ही नही थे, बल्कि उनका उत्तर प्रदेश के दिग्गज नेताओं में शुमार किया जाता हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा पार्टी छोड़ते ही उनके कई समर्थक नेताओं औ विधायक ने भी बीजेपी का साथ छोड़ दिया हैं। बीजेपी से अब तक 14 विधायको ने इस्तीफा दे दे दिया है। जिसमे राकेश राठौर, जय चौबे, माधुरी वर्मा और आर के शर्मा पहले ही सपा में शामिल हो चुके थे, तो वहीं पर अवतार सिंह भडाना आरएलडी में शामिल हो गए है।
स्वामी प्रसाद मौर्य के कद और प्रभाव का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है कि उनके सपा में चले जाने के बावजूद बीजेपी उन्हें पुनः वापस लाने की जोर-जुगत में लगी हुई थी।
उत्तर प्रदेश की राजनीति से सम्बन्ध रखने वाले लोग इस बात से भलीभांति परिचित हैं कि उत्तरप्रदेश के चुनावों में जाति कितना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। स्वामी प्रसाद मौर्य यूपी के बड़े पिछड़ी जाति वर्ग के नेता हैं। इस तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध उस अभियान को बल मिलेगा कि उत्तर प्रदेश में ‘ऊंची जातियों’ की सरकार है। दूसरी तरफ़ बीजेपी ओबीसी को अपने साथ लामबंद करने की भरपूर कोशिश कर रही है।
उत्तरप्रदेश में सात चरणों में होने वाले चुनाव में 10 फरवरी, 14 फरवरी, 20 फरवरी, 23 फरवरी, 27 फरवरी, 3 मार्च और 7 मार्च को मतदान होगा। 10 मार्च को चुनाव के नतीजे आएंगे।







