नई शिक्षा नीति से दूर होगी बेरोजगारी

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शिक्षा के साथ टेक्निकल कोर्स छात्रों को बनाएंगे रोजगाज परख

भारत में नई शिक्षा नीति लागू हो चुकी है। शिक्षा समाज के विकास के लिए बहुत जरुरी है। प्राचीन भारत में भी इस पर विशेष ध्यान दिया जाता था। समय के साथ इसके माध्यम में, तौर-तरीकों में परिवर्तन भी जरूरी होता है जिसे अपनाया जाना चाहिए। ऐसा न करने पर हम अन्य समाजों से पीछे रह जाते हैं। भारत की मौजूदा शिक्षा नीति करीब पैंतीस साल से यथावत चली आ रही थी। इतना लम्बा समय वास्तव में उसके परिवर्तन की आवश्यकता को और मुखर कर देता है।

1992 में इस नीति में बदलाव जरूर किया गया लेकिन उसको पर्याप्त नहीं माना जा रहा था। इसीलिए भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के अपने चुनावी घोषणा पत्र में नई शिक्षा नीति लाने का अहम वादा भी किया था। सत्ता में आने के बाद उसने इस दिशा में कदम भी उठाया और अब तमाम सुझावों के बाद यह नीति घोषित कर दी गई है। इसके तहत स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों को मंजूरी दी गई है।

खास बात यह है कि इसें रटने-रटाने के दौर से निकलकर ज्ञान, विज्ञान और बुद्धि कौशल ध्यान केंद्रित किया गया है। नई नीति के तहत पाठ्यक्रम को मूल मुद्दों तक सीमित रखा जाएगा। साथ ही ज्ञानपरक वस्तुओं और कौशल विकास को इसमें जोड़ा जाएगा। इस नीति के बाद स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा में जो बदलाव किए गए हैं, उनमें स्कूली शिक्षा कके ढांचे को नया रूप दिया गया है। इसमें अब प्री-प्राइमरी भी जोड़ दिया गया है।

नई शिक्षा नीति का ध्येय स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक समय की मांग के अनुरूप पाठ्यक्रमों में बदलाव एवं उसके जरिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं को प्रतिस्पर्धी परिवेश के लिए तैयार करना है। देश में जिस तरह से शिक्षा के क्षेत्र में विषमता बढ़ती गई है, उनमें बुनियादी शिक्षा व उच्च शिक्षा के स्तर पर व्यावहारिक बदलाव लाने की मांग उठती रही है। समय बदलने के साथ सबसे बड़ी आवश्यकता शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने की थी लेकिन यह नहीं हो पा रहा था। नई शिक्षा नीति के आने से ये सारी दिक्कतें दूर हो सकती हैं। अब जरूरत यह है कि इसे पूरी तरह शीघ्रातिशीघ्र लागू किया जाय।

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