वाहन जुर्माने पर घमासान: प. बंगाल ने लागू करने से किया इनकार, दिल्ली सरकार कर रही विचार
उत्तराखंड सरकार ने दी राहत
नई दिल्ली,12 सितम्बर 2019: राज्यों के सस्ता, मंहगा चालान के चक्कर में केंद्र सरकार उलझ कर रह गयी है कई राज्यों में तो अपने ही लोग नियम लागू करने में आनाकानी कर रहे हैं, तो कहीं चालान लागू किया गया भी तो उसे सस्ता कर दिया गया। उधर भाजपा की धुर विरोधी तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने प. बंगाल में इस नियम को लागू करने से किया इनकार दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नए मोटर वाहन अधिनियम के तहत भारी भरकम जुर्माने को लेकर घमासान छिड़ गया है। पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो अपने राज्य में इसे लागू करने से ही साफ इनकार कर दिया है। विपक्ष जहां नए अधिनियम को अव्यावहारिक करार दे रहा है, वहीं विधानसभा के आसन्न चुनावों के मद्देनजर भाजपा शासित राज्य भी इसे लागू करने में हिचकिचा रहे हैं। कई राज्यों ने इसे लागू न करने का ऐलान किया है। यहां तक कि भाजपा शासित राज्य गुजरात ने जुर्माने की रकम को आधा कर दिया है तो उत्तराखंड ने जुर्माने में मामूली राहत दी है। वहीं महाराष्ट्र ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिख कर इस पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। इस बीच दिल्ली सरकार ने भी जुर्माने की रकम आधा करने के संकेत दिये हैं।
बता दें कि उत्तराखंड में वाहन चालकों की हड़ताल के बाद प्रदेश कैबिनेट ने संशोधित मोटर यान अधिनियम के उल्लंघन पर विभिन्न मामलों में केंद्र सरकार द्वारा तय जुर्माना राशि में कुछ राहत देने का फैसला लिया है। अधिसूचना जारी होने के बाद जुर्माने (शमन शुल्क ) की ये दरें लागू होंगी।
हेलमेट के बिना चलने पर 1000 रुपये जुर्माना होगा। ओवर स्पीडिंग पर प्रदेश में 2000 रुपये जुर्माना होगा। पहले यह 400 से 1000 रुपये था। वाहन चलाते वक्त मोबाइल के इस्तेमाल पर पहली बार 1000 रपए तो दूसरी बार 5000 रपए जुर्माना होगा। खतरनाक ढंग से वाहन चलाने पर 1000 की बजाय 2000 रुपये जुर्माना होगा । वायु व ध्वनि प्रदूषण पर केंद्र ने 10 हजार जुर्माना रखा है पर प्रदेश में पहली बार में 2500 रपए तो दूसरी बार में 5000 रपए जुर्माना होगा।
यह राज्य कर रहे जुर्माने में ढील देने पर विचार:
पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र







