15 जनवरी से चल रहा मेला पांच फरवरी तक चलेगा, शनिवार को भी वैज्ञानिकों ने दी आधुनिक औषधीय खेती की जानकारी
15 जनवरी से सीएसआईआर-केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप) लखनऊ में चल रहे किसान मेले के तेरहवें दिन भी किसानों व उद्यमियों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। किसान मेला में अबतक छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल तथा मध्य प्रदेश से आए किसानों ने भाग लिया है।

सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक, डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने शनिवार को किसान मेला-2021 में आए हुए कृषकों को संबोधित करते हुए कहा कि सीएसआईआर-सीमैप लगभग छह दशक से आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय एवं सगंध पौधों की नई-नई प्रजातियों का संशोधन कर किसानों को आर्थिक लाभ दिलाने हेतु कार्य करता आ रहा है। सीएसआईआर-सीमैप अपने शोधन एवं विस्तार कार्य से किसानों के बीच जन जागृति करता आ रहा है और उस कार्य के फलस्वरूप आज मेंथा के तेल उत्पादन और बिक्री में भारत विश्व में अग्रणी श्रेणी पर विराजमान है। उन्होंने आगे कहा कि इस किसान मेले को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य संस्थान में हो रहे नित नए शोधों को किसानों व आम जन मानस से रूबरू कराना है।
इस अवसर पर सीएसआईआर-सीमैप के पूर्व निदेशक, प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने एरोमा मिशन परियोजना के अंतर्गत किए गए कार्यों की सराहना की और परियोजना के दूसरे भाग से जुड़े वैज्ञानिकों से और अधिक कार्य करने का आह्वान किया।
सीएसआईआर-सीमैप के प्रयासों से अब तक एरोमा इंडस्ट्री से शैलेंद्र जैन, शैवी इंडस्ट्रीज़, लखनऊ और मनिन्दर सिंह, यथावत एरोमेटिक, आगरा, टेकराम शर्मा आश्री मेंथाल, बाराबंकी तथा गौरव मित्तल, एरोमेटिक एंड एलाइड केमिकल्स लिमिटेड, बरेली, अजमल बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई के मिलिंद देशपांडे, कमलेश शाह, बीकेके स्पेसलिस्ट, मैनुफेक्चरर ऑफ एरोमेटिक केमिकल, मुंबई व कैंकोर इंग्रेडिएंट्स प्राइवेट लिमिटेड, बरेली के विक्रम जी, यशराज, एरोमेटिक एंड एलाइड केमिकल्स लिमिटेड, बरेली व बी. एन. त्रिपाठी एक्स्पो एशेन्शियल एंड एक्स्पो ओर्गेनिक ने आकर किसानों को सुगंधित तेलों के राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार की मांग और गुणवत्ता संबंधी जानकारी साझा की एवं तेल खरीदने का आश्वासन दिया।
किसान गोष्ठी में सीमैप के वरिष्ठ वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन किसान मेला का महत्वपूर्ण भाग रहा है। इसमें डॉ. आलोक कालरा ने वर्मी कम्पोस्ट बनाने की तकनीकी की जानकारी दी तथा डॉ. सौदान सिंह एवं डॉ. अनिल कुमार सिंह ने जिरेनियम की कृषि तकनीकी के बारें में विस्तार से चर्चा की। दीपक कुमार वर्मा ने रोशाघास, डॉ. संजय कुमार ने मेंथा, खस व अन्य औषधीय पौधों की खेती के बारे में बताया। डॉ. वी. आर. सिंह ने औषधीय फसलों पर प्रकाश डाला।
डॉ. करुणा शंकर ने औषधीय फसलों के गुणवत्ता विधि संबंधी मार्गदर्शन किया तथा डॉ. पुजा खरे ने बायोचार की तकनीकी को सरल शब्दों मे बताया। डॉ. रमेश श्रीवास्तव ने नीबूघास की कृषि तकनीकी को किसानों को बताया। किसान गोष्ठी में किसानों ने अगेती मिंट तकनीकी, जिरेनियम की खेती व इसकी पौध सामग्री को कैसे बचाया जाय। इस सत्र का संचालन डॉ. राम सुरेश शर्मा ने किया। किसान मेला अगले 5 फरवरी, 2021 तक किसान मेला सुचारु रूप से चलता रहेगा। कार्यक्रम का संचालन तथा आभार प्रदर्शन डॉ. ऋषिकेश ने किया।







