अकादमिक संंस्थान का पहला उद्देश्य छात्र कल्याण है: कुलपति

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लखनऊ विवि में हुई बैठक, 120 कालेजों ने वेबिनार बैठक में लिया हिस्सा

लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक राय ने सभी सहयुक्त कालेजों के प्रबंधक अथवा प्राचार्यों के साथ वेबिनार के माध्यम से बैठक की। इस बैठक में 120 से अधिक महाविद्यालयों ने भाग लिया। इस बैठक में आगामी योजनाओं पर विचार किया गया। कुलपति ने कहा कि अकादमिक संस्थान का अस्तित्व उसकी महत्ता एवं उसकी उपयोगिता छात्रों से होती है। किसी भी अकादमिक संस्थान का पहला उद्देश्य छात्र कल्याण, छात्र हित है।

इस निमित्त प्रोफेसर आलोक राय ने प्रत्येक महाविद्यालय से प्रत्येक अकादमिक सत्र का अकादमिक ऑडिट कराने, ई लर्निंग तथा ई कन्टेन्ट विधियों को बढ़ावा देने, छात्र परामर्शदाता नियत करने तथा खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों को इन सभी का मूल्यांकन कर उनका सारांश नियत प्रारूप पर विश्वविद्यालय को उपलब्द्ध कराना होगा तथा स्वमूल्यांकन करते हुए आवश्यक कदम उठाने होंगे|

वर्तमान अकादमिक सत्र की गतिविधियों की योजनाओं के क्रियान्यवन हेतु कई महाविद्यालयों के प्रबंधकों, प्राचार्यों ने कई प्रश्न भी पूछे, जिनका उत्तर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता महाविद्यालय विकास परिषद् प्रोफेसर अवधेश त्रिपाठी, कुलसचिव डॉक्टर विनोद कुमार सिंह , प्रवेश परीक्षा समन्वयक प्रोफेसर अनिल मिश्रा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर पूनम टंडन आदि अधिकारियों ने दिया।

अधिष्ठाता, महाविद्यालय विकास परिषद्, लखनऊ विश्वविद्यालय प्रोफेसर अवधेश त्रिपाठी ने बताया कि सी.एस. आई.सी, स्पेन की वेबो मैट्रिक्स के नतीजों में लखनऊ विश्वविद्यालय प्रदेश के सभी शैक्षणिक विश्वविद्यालयों में प्रथम स्थान पर है। यह विश्वविद्यालय तथा सहयुक्त महाविद्यालयों के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को बैठक की कार्यसूची से पुनः अवगत कराया।

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