चौरी-चौरा काण्ड पर संस्कृति विभाग उ.प्र. की प्रतियोगिता, संगीत नाटक अकादमी के फैसले में वाराणसी के चन्द्रशेखर गोस्वामी बने विजेता
लखनऊ, 28 जनवरी 2021: संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा स्वाधीनता संग्राम के अंतर्गत पांच फरवरी 1922 को गोरखपुर में हुए चौरी-चौरा काण्ड की स्मृतियों को ताजा करते हुए प्रदेश स्तर पर चैरी-चैरा गीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। चार फरवरी 2021 से प्रारम्भ होकर पूरे एक वर्ष तक चलने वाले इस चौरी-चौरा महोत्सव की पूर्व वेला में आयोजित इस प्रतियोगिता में संगीत नाटक अकादमी द्वारा गठित विशेषज्ञों की समिति ने वाराणसी के चन्द्रशेखर गोस्वामी को प्रथम विजेता चुना। प्रथम पुरस्कार विजेता को 51 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया जायेगा।
चौरी-चौरा कांड पांच फरवरी 1922 को ब्रिटिश भारत में गोरखपुर जिले के ग्रामों चौरी-चौरा में घटा था, जब असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह पुलिस के साथ भिड़ गया था। जवाबी कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों ने हमला किया और एक पुलिस स्टेशन में आग लगा दी थी। महात्मा गांधी ने विदेशी कपड़ों के बहिष्कार, अंग्रेजी पढ़ाई छोड़ने और चरखा चलाकर कपड़े बनाने का आह्वान किया था। उनका यह सत्याग्रह आंदोलन पूरे देश में रंग ला रहा था। चार फरवरी 1922 दिन शनिवार को चौरी-चौरा के भोपा बाजार में सत्याग्रही इकट्ठा हुए और थाने के सामने से जुलूस की शक्ल में गुजर रहे थे। तत्कालीन थानेदार ने जुलूस को अवैध मजमा घोषित कर दिया। एक सिपाही ने वालंटियर की गांधी टोपी को पांव से रौंद दिया। गांधी टोपी को रौंदता देख सत्याग्रही आक्रोशित हो गए।
प्रतियोगिता में इन घटनाओं को थीम सांग की तरह काव्य में ढालकर इस तरह प्रस्तुत करना था कि इस काण्ड में शहीद हुए बलिदानियों की गौरव गाथा लोगों के सामने आ सके। प्रतियोगिता के लिए विभिन्न जिलों से लगभग चालीस प्रविष्टियां विभाग को प्राप्त हुईं।
प्रथम चुने गये वाराणसी के चन्द्रशेखर गोस्वामी की पंक्तियां थीं- ‘चार फरवरी उन्नीस सौ बाइस ने ली अंगड़ाई, ब्रिटिश हुकूमत चौरी-चौरा काण्ड देख घबराई, गोरों की सत्ता थर्राई, खुशबू स्वतंत्रता की आई।’
बहराइच के अरुण प्रताप ने रचना में आल्हा खण्ड का प्रयोग किया था। कक्षा दस की छात्रा मिताली सिंह ने- ‘आया रे…..शताब्दी वर्ष समारोह आया रे’ रचना प्रतियोगिता में प्रस्तुत की।
मीरजापुर की प्रतिभागी सुप्रिया पाण्डेय की रचना में- ‘अब प्रतिशोध की ज्वाला में चारों ओर से थाना घेर लिया’ जैसी पंक्तियां उल्लिखित थीं। प्रतियोगिता में एसएन सेन बालिका विद्यालय कानपुर, पूर्णादेवी गल्र्स इण्टर कालेज कानपुर, प्रकाश नारायण इण्टर कालेज जैसे विद्यालय के छात्र-छात्राओं के संग ही विजयशंकर विश्वकर्मा गोरखपुर, अंशिका मिश्रा, कुमारी नव्या, सत्यार्थ आदि प्रतिभागियों ने रचनाएं पेश कीं।
संगीत नाटक अकादमी के सचिव तरुण राज ने बताया कि अकादमी सभागार में टीवी स्क्रीन पर देखकर और रचना की पाण्डुलिपि प्रतियों के आधार पर गठित निर्णायक समिति ने फैसला किया। अकादमी द्वारा गठित समिति में निर्णायकों के तौर पर आकाशवाणी से जुड़े वरिष्ठ संगीतकार केवल कुमार व गज़ल गायक उस्ताद युगांतर सिंदूर, लोककलाविद् डा.विद्याविंदु सिंह, वरिष्ठ गायक धर्मनाथ मिश्र व भातखण्डे संगीत संस्थान समविश्वविद्यालय के गायन विभाग की अध्यक्ष डा.सृष्टि माथुर शामिल थीं।







