प्रस्तावना ही संविधान की मूल भावना का परिचय, दोहराई 22 प्रतिज्ञाएं
लखनऊ। सोमवार को एक बार फिर छात्रों ने बीबीएयू प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि पुलिस बल और सुरक्षा गार्डो के बल पर विवि की समस्यायों की आवाज उठाने वाले छात्रों का दमन किया जा रहा है।
दरअसल बीबीएयू के छात्रों की ओर से प्रस्तावना दिवस का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था। विधि छात्र गौरव भी कार्यक्रम में शामिल होने को ज़ब विवि गेट पर पहुंचा तो सुरक्षा गार्डो ने उसे रोक लिया और विवि परिसर में प्रवेश नहीं दिए।

कार्यक्रम के लिए एकठ्ठा हुए छात्रों ने सुरक्षा गार्डो के इस कृत्य को देखकर नाराज हुए।छात्र गौरव वर्मा को प्रवेश देने को लेकर सुरक्षा गार्डो और छात्रों में तनातनी भी हुई। हालांकि छात्रों को उग्र होते देख सुपरवाइजर और सुरक्षा गार्डो ने गौरव को विवि परिसर में प्रवेश दे दिया।
मूल प्रस्तावना का पाठ कर वक्ताओं ने बताया कि आज ही के दिन 22 जनवरी 1947 को संविधान की प्रस्तावना बन कर तैयार हुई। प्रस्तावना संविधान की मूल भावना का परिचय है। इसके अनुसार भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है। जिसके अनुसार यहां रहने वाले हर व्यक्ति को बराबर का अधिकार है। छात्रों द्वारा भारतीय संविधान की मूल प्रस्तावना एंव राष्ट्र निर्माता बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर द्वारा 24 अक्टूबर 1956 को धर्मदीक्षा के अवसर पर दी गई 22 प्रतिज्ञाएं दोहराई गयी।







