15 दिनों की फ्री वर्कशॉप के बाद युवा कलाकारों ने रचा इतिहास, दर्शक बोले – “दिल छू गया!”
रामनगर (बाराबंकी)। रामलीला मंच पर संस्कृत की देववाणी गूंजी तो पूरा माहौल रामायण काल में पहुंच गया! उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ और आदर्श सेवा संस्थान के संयुक्त आयोजन में 15 दिवसीय निशुल्क संस्कृत नाट्य कार्यशाला के समापन पर महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की अमर कृति ‘राम की शक्ति पूजा’ पर आधारित संस्कृत नाटक “आदि शक्ति राम शक्ति” का शानदार मंचन हुआ।
दर्शकों की भारी भीड़ ने राम-लक्ष्मण-हनुमान के अभिनय को खड़ा होकर तालियां दीं।
मुख्य भूमिकाओं में:
राम → सुमित श्रीवास्तव
लक्ष्मण → अभिनव सिंह
हनुमान → अभिजीत सिंह
मां भीमा → आकांक्षा पांडे
इनके साथ करीब 20 कलाकारों ने नाट्यशास्त्र के रस, भाव और भंगिमाओं का ऐसा जादू चलाया कि पूरा मैदान नाट्यमय हो उठा।
प्रशिक्षण का जादू
कार्यशाला में संस्कृत विद्वान डॉ. अनिल कुमार गौतम और डॉ. अशोक कुमार शतपथी ने भारतीय नाट्यशास्त्र, रस सिद्धांत और अभिनय पर गहन व्याख्यान दिए। निर्देशक ललित कुमार पोखरिया ने आंगिक अभ्यास, उच्चारण, संवाद और अभिनय कला सिखाई – जिसका नतीजा आज के धमाकेदार प्रदर्शन में दिखा।
मुख्य अतिथि पूर्व विधायक शरद कुमार अवस्थी ने दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा, “संस्कृत ही वह भाषा है जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का संदेश देती है – श्री राम इसके जीते-जागते आदर्श हैं।”
विशिष्ट अतिथियों में सामाजिक कार्यकर्ता रत्नेश कुमार, पंकज चतुर्वेदी, संत कुमार उपाध्याय सहित कई कवि और पत्रकार मौजूद रहे। रत्नेश कुमार ने संस्कृत को “ज्ञान की जननी और सांस्कृतिक धरोहर” बताया।
आयोजक डॉ. सुरेश चंद्र शर्मा ने सभी अतिथियों, कलाकारों और हजारों दर्शकों का धन्यवाद किया। मंच संचालन कवि हरिदत्त पांडे ने बखूबी किया। रामलीला सेवा समिति और स्थानीय सहयोगियों का भी अहम योगदान रहा।
संस्कृत के माध्यम से सनातन संस्कृति का यह जीवंत उत्सव बाराबंकी में यादगार बन गया , जहां भाषा नहीं, बल्कि भावनाएं बोल रही थीं!







