कल आज और कल : अजीत कुमार सिंह
छिति जल पावक गगन समीरा पांच तत्व से बना शरीरा….भू, गगन, वायु, नीर और अग्नि यही भगवान है भारत के किसी राजनीतिक दल के एजेंडे में प्रकृति का सरंक्षण उसका बचाव कोई मुद्दा ही नही है प्रकृति मौसम का बदलाव सब यथावत अपने रूप में ही अनवरत चल रहा है उसमें परिवर्तन पर इतना हाहाकार और नौटंकी काहे इसका बिगड़ा हुआ स्वरूप सब हमारा ही किया धरा है बरसात भी आएगी गर्मी भी पड़ेगी ठंडी भी पड़ेगी सारे मौसम आएंगे जाएंगे हवा पानी सूरज गर्मी सब अपने उसी रूप में हैं उसी चक्र में घूम रहे हैं अब आपने प्रकृति को जो दिया है उसकी भरपाई आपको करनी है गर्मी ठंडी बरसात सब कुछ वैसे ही पड़ रहा है।
लेकिन अब विकास इतना तगड़ा हो गया है तरक्की इतनी भयावह हो गयी है कि 2- 4 लहरा पानी पड़ने पर भी शहर की सड़कें फूलने पचकने लगती है हर जगह पूरा कंक्रीट का जंगल बना दिया है एक दो राउंड पानी पहले पड़ता था तो धरती ही सोख लेती थी। वर्षा की बूंदे जब तपती धरती पर पड़ती थी तो उस पर उसका पहला अधिकार होता था। पहली बारिश से तपती हुई धरती को जो सुकून मिलता है फिर आबोहवा से जो माटी की सोंधी खुशबू आती थी वह सब गायब हो रही है।
वातानुकूलित गाड़ियों के काफिले वातानुकूलित कमरे वातानुकूलित ऑफिस यह कुछ लोगों को ठंडी तो देते हैं, लेकिन वातावरण में जो गर्मी उत्सर्जित करते हैं उससे पूरा जनमानस त्राहिमाम त्राहिमाम करता रहता है नदी, नदी नहीं रही, जंगल, जंगल नहीं रहा, बाग बगीचे सब अपना मौलिक स्वरूप खो रहे हैं हमने अपने बचपन में कभी नहीं सोचा था कि पानी भी खरीद के पीना पड़ेगा। अब वह बाकायदा व्यापार बनता जा है ऐसे आज का बचपन यह जरूर सोचे कि आने वाले समय में उसको शुद्ध हवा भी खरीद के सांस लेनी पड़ेगी असंभव कुछ नहीं है प्रकृति प्रेमी हमेशा अंधाधुंध औद्योगिकीकरण का विरोध करता है इसलिए कोई भी देश भारत ही नहीं सभी देश प्रकृति प्रेमियों को पर्यावरणविदों को देशद्रोही ही मानती हैं।
आज तक किसी पर्यावरण विद को न भारत रत्न मिला न नोबेल पुरस्कार विश्व के तमाम विकसित देशों ने बहुत से भारी-भरकम उद्योगों को जिसमें पर्यावरण को नुकसान होता था उन्होंने सब बंद करके विकासशील देशों की ओर धकेल दिया। प्लास्टिक बंद हो रही है तो पेपर बैग आ रहा है। अब पेपर किस से बनता है वह गूगल पर सर्च कर लीजिए जब पर्यावरण दिवस पर पेड़ लगाने की फोटो बाजी नहीं होती थी। तब आप की पुरखे पुरेनिया कितना पेड़ लगा गए और आपने कितना लगाया है दोनों की तुलना कर लीजिए।






