लॉकडाउन के चलते परिजन अन्तिम संस्कार में नही हो पाये शामिल
वाराणसी,05 अप्रैल 2020: कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन में परिजन संकट और दुख की घड़ी में भी अपनों तक नही पहुंच पा रहे है। ऐसे में सामाजिक वर्जनाओं को तोड़ कर एक पत्नी ने पति को मुखाग्नि दी। रविवार को यह हृदय विदारक नजारा जनपद चंदौली के पड़ाव स्थित अवधुत भगवान राम घाट पर गंगा किनारे दिखा। महिला को परेशान देख आसपास के लोगों ने अन्तिम संस्कार में उसकी मदद कर मानवता का नजीर पेश किया।
जनपद चंदौली के बबुरी बाजार निवासी संतोष जायसवाल की तबीयत खराब होने पर उनकी पत्नी गुड़िया जायसवाल उन्हें लेकर अपने मायके पं.दीन दयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय) स्थित अस्पताल आई। यहां इलाज के दौरान गुड़िया के भाई का निधन हो गया। इसके बाद भी गुड़िया भाई के परिजनों की सहायता के साथ पति के इलाज में जुटी रही। पति की बीमारी लगातार बढ़ने से उसकी जमा पूंजी भी खत्म होने लगी।
इसी दौरान कोरोना के चलते लॉकडाउन हो गया। पैसा खत्म हो पाने पर गुड़िया ने अपने रिश्तेदारों से गुहार लगाई। लेकिन लोग लॉकडाउन के चलते उसकी मदद नही कर पाये। समुचित इलाज के अभाव में रविवार को गुड़िया के पति की मौत हो गईं। गुड़िया ने फिर अपने परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सूचित किया। लेकिन लॉकडाउन में पुलिस के उत्पीड़न के भय से परिजन नही आये। यह देख गुड़िया हिम्मत बांध पति के अन्तिम संस्कार के इंतजाम में जुट गई।
आर्थिक समस्या और शव गंगा तट अकेले लेकर कैसे जाय इसको लेकर गुड़िया परेशान हो गईं । फिर उसने क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य सूर्यमुनि तिवारी से मदद की गुहार लगाई। जिला पंचायत सदस्य ने सहयोगी पड़ाव निवासी शिवशंकर सिंह पटेल, सुभाष मौर्या से बातचीत की।
इस पर सभी ने मिलकर महिला की मदद कर अंतिम संस्कार की सारी व्यवस्था उपलब्ध कराई। शव को पड़ाव स्थित अवधुत भगवान राम घाट स्थित शमशानघाट पर पहुंचाया। यहां जिला पंचायत सदस्य ने सहयोगियों की मदद से चिता सजवा दिया। इसके बाद संतोष के पार्थिव शव को मुखाग्नि कौन दे यक्ष प्रश्न बन गया। गुड़िया ने फिर सामाजिक मान्यताओं को किनारे कर खुद पति को मुखाग्नि दी। और अन्तिम संस्कार का पूरा विधान पूरा किया। गुड़िया के इस कार्य का सोशल मीडिया में लोगों ने जमकर सराहना की। गुड़िया को तीन वर्ष की एक बेटी है।







