क्रोक कैंप में रात को अक्सर बाघ की दहाड़ और हाथी की चिंगाड़ को सुना जा सकता है; अनुराग प्रकाश

0
429

प्राकृतिक जंगलों से प्रेम करना तो कोई वन्यजीव प्रेमी अनुराग प्रकाश से सीखे । वह कहते है कि मेरा निवास जिसे मैंने croc camp का नाम दिया है वो दुधवा टाइगर रिज़र्व के समीप एवं नकुआ नदी से मात्र 1KM की दूरी पर स्थित है। नकहुआ और आस पास का एरिया मगरमच्छो, कछुओ एवं उदबिलावो का एक उत्तम प्राकर्तिक आवास है।

मेरे कैंप पर एक विशाल पीपल का पेड़ है जो कई वर्षों पुराना है । इस पेड़ पर 4 -5 साँप की प्रजाति, 3-4 गोह एवं 2 5 से ज्यादा प्रजाति कि चिडिय़ा निवास करती है। पिछले कुछ महीनो में हमने करीब 1 1 2 प्रजाति कि चिड़ियों को अपने कैंप के आस पास देखा है एवं उन्हें सूचीबद्ध किया है और ये प्रक्रिया जारी है। पीपल का ये पेड़ कई वर्ष पुराना है समस्त ग्रामवासी इसकी पूजा करते है और उनकी मान्यता के मुताबिक बाघ साल में एक बार इस पेड़ के नीचे जरूर आता है।

कैंप पर शाम होते ही हिरन, जंगली सुअर, सियार आदि जानवरो को आवागमन करते हुए आसानी से देखा जा सकता है तथा रात को अक्सर हाथी की चिंगाड़ एवं बाघ की दहाड़ को सुना जा सकता है और ये अक्सर कैंप के काफी पास तक आ जाते है। एक वन्यजीव एव प्रकृतिप्रेमी के लिए यह एक उपयुक्त जगह है। मैं ऊपर वाले को धन्यवाद देता हूँ कि उसने मुझे ऐसी जन्नत में रहने का मौका दिया।

Please follow and like us:
Pin Share

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here