पहने कछुए की अंगूठी, घर में आएगी समृद्धि!

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आप जब भी कछुए की अंगूठी खरीदने जाये तो शुक्रवार का दिन शुभ होता है। खरीदने के बाद तुरंत ही ना पहने उसे लक्ष्मी जी के सामने दूधिया पानी से धोकर अगरबत्ती कर पहनें

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कछुए की अंगूठी आमतौर पर बहुत लोगों के हाथों में दिख जाती है। कुछ लोग इसे सिर्फ फैशन के लिए पहनते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जो इसे वास्तु से जोड़कर पहनते हैं। वास्तुशास्त्री रुद्रशास्त्री के अनुसार इसे पहनने से व्यापार, आत्मविश्वास और सेहत दुरुस्त रहती है। लक्ष्मी जी का घर में विराजमान रहता है। लेकिन कछुए की अंगूठी पहनते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। वरना इसके लाभ नहीं होते।

पुराणी कथाओं के अनुसार, कछुआ भगवान विष्णु का एक अवतार रहा है। कछुआ धैर्य, शांति, निरंतरता और समृद्धि का प्रतीक है। कछुए अंगूठी पहनते समय यह हमे यह ध्यान रखना चाहिए कि कछुए के सिर वाला हिस्सा पहनने वाले की तरफ होना चाहिए। इससे घर में धन आने की संभावना बढ़ जाती है। यह बाहर का पैसा आपकी ओर आकर्षित करता होगा।

अंगूठी को सीधे हाथ की मध्यमा या तर्जनी उंगली में पहनें
  • ये भी कहा जाता है की लक्ष्मी जी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, इसलिए कछुआ भी लक्ष्मी जी का प्रिय माना जाता है। ऐसे में लोगों को ऊर्जा व आत्मविश्वास के लिए ऐसी अंगूठी पहनने की सलाह दी जाती है। कछुए के शेप की अंगूठी को सीधे हाथ की मध्यमा या तर्जनी उंगली में पहनें।
  • आप जब भी कछुए की अंगूठी खरीदने जाये तो शुक्रवार का दिन शुभ होता है। खरीदने के बाद तुरंत ही ना पहने उसे लक्ष्मी जी के सामने दूधिया पानी से धोकर अगरबत्ती कर पहनें। ऐसा बल्कि नहीं है कि अंगूठी पहनने के बाद तुरंत धन की बरसात होगी। जो आपके भाग्य का धन होगा, उसकी रुकावटें दूर हो जाएंगी।
  • कछुआ संपन्नता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। लेकिन फैशन में भी कछुएं वाली अंगूठी ने खास जगह बनाई है। आजकल लडकियां में कछुआ रिंग बहुत ही लोकप्रिय हो रही है। घर में बरकत बनी रहे इसलिए कछुआ पालते हैं, लेकिन अब वहीं कछुआ रिंग फैशन वल्र्ड में अपनी स्पेशल पहचान बना रहा है। इस कछुएं वाली अंगूठी को आप अपने बजट के मुताबिक बना सकते हैं। चाहे तो चांदी, सोने में जडे नग द्वारा बनवा सकते हैं।
  • कछुए को संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। कछुएं वाली अंगूठी को आप अपनी सामर्थ्य के मुताबिक बनवा सकते हैं। चांदी, सोने में जडे नग द्वारा भी बनवा सकते हैं.प्रसिद्ध वास्तुशात्री संजीव कुमार बताते हैं कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, कछुआ भगवान विष्णु का एक अवतार रहा है. कछुआ धैर्य, शांति, निरंतरता और समृद्धि का प्रतीक है. लक्ष्मी जी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, इसलिए कछुआ लक्ष्मी जी का भी प्रिय माना जाता है. ऐसे में लोगों को ऊर्जा व आत्मविश्वास के लिए ऐसी अंगूठी पहनने की सलाह दी जाती है. यह रिंग पहनते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि कछुए के सिर वाला हिस्सा पहनने वाले की तरफ होना चाहिए।