Home ब्लॉग नई सुबह जैसी सुरंग: मोदी ने साकार किया अटल का सपना

नई सुबह जैसी सुरंग: मोदी ने साकार किया अटल का सपना

0
300
  • डॉ दिलीप अग्निहोत्री

रोहतांग सुरंग का सपना अटल बिहारी वाजपेयी ने देखा था। प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने इसकी कार्य योजना भी बनाई थी। इसका सामरिक रूप से बहुत महत्व है। नरेंद्र मोदी सरकार ने इस बेहद कठिन कार्य को पूर्ण करके दिखा दिया। इतनी ऊंचाई पर विश्व की सबसे बड़ी सुरंग का निर्माण आसान नहीं था। यहां के पत्थर बहुत कठोर है। इसके अलावा अनेक दुर्गम स्थल भी इसके रास्ते में थे। इन सबका मुकाबला किया गया, उनका समाधान किया गया। इसका आधुनिक दृष्टि से निर्माण किया गया है। इसका व्यापक महत्व है।

चीन से संघर्ष की दशा में यह बहुत उपयोगी साबित होगी। पहले इसका नाम रोहतांग सुरंग था। इसके निर्माण की योजना अटल बिहारी वाजपेयी ने बनाई थी। इसलिए उनके नाम पर उसका नामकरण किया गया। नौ किमी लंबी यह सुरंग दस हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस प्रकार इसे दुनिया की सर्वाधिक ऊंचाई पर निर्मित सुरंग का गौरव मिला। इससे लेह और मनाली के बीच की दूरी छियालीस किमी कम हो जाएगी। अटल जी के निर्देश पर इस परियोजना पर विचार प्रारंभ किया गया था।

दो हजार तीन में इस परियोजना को अंतिम तकनीकी स्वीकृति मिली थी। इससे रोहतांग दर्रे के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हुआ है। मनाली वैली से लाहौल और स्पीति वैली तक पहुंचने में करीब पांच घंटे का समय लगता था। अब मात्र दस मिनट लगेंगे। पहले बर्फबारी के कारण वर्ष में छह महीने यह मार्ग बंद रहता था। अब लद्दाख में तैनात सैनिकों सुगम संपर्क कायम रहेगा। उन्हें हथियार और रसद न्यूनतम समय में पहुंचाई जा सकेगी। आपात परिस्थितियों के लिए इस सुरंग के नीचे एक अन्य सुरंग का भी निर्माण किया जा रहा है। यह किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बनाई जा रही है और विशेष परिस्थितियों में आपातकालीन निकास का काम करेगी।

नई सुबह जैसी सुरंग:

नरेंद्र मोदी को हिमाचल प्रदेश में कार्य करने का व्यापक अनुभव रहा है। तब वह इस प्रदेश में भाजपा के प्रभारी थे। अपने स्वभाव के अनुरूप वह यहां भी लगातार सक्रिय रहते थे। यहां के लोगों से उनका सीधा संवाद व परिचय रहता था। हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों का भी उन्हें पूरा ज्ञान था। यहां अटल टनल के उद्घाटन को उन्होंने अपना सौभाग्य बताया। अटल बिहारी वाजपेयी हिमाचल प्रदेश को अपना घर मानते थे। इसी प्रकार यहां जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए नरेंद्र मोदी का भी लगाव रहा है। यहां की यात्रा मोदी के लिए भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण होती है। दुनिया की सबसे बड़ी सुरंग का उद्घाटन तो अपने में भी विशेष था। इसलिए नरेंद्र मोदी ने अटल टनल के वर्चुअल लोकार्पण से इनकार कर दिया था।

उन्होंने इस कोरोना काल में भी यहां जाने का निर्णय लिया था। मोदी ने मजाक में कहा भी कि मैं यह नहीं जानता कि मेरा हिमाचल पर कितना अधिकार है, लेकिन हिमाचल का मुझ पर पूरा अधिकार है। इसलिए एक दिन में यहां तीन कार्यक्रम लगाए गए। मोदी ने भी इसे अवसर के रूप में स्वीकार किया। यहां के कार्यक्रम मुख्यरूप से दो रूप में महत्वपूर्ण रहे। पहला यह कि यह देश की सुरक्षा से भी जुड़ा था। अटल टनल से सामरिक सुविधा भी मिलेगी। दूसरा यह कि इन कार्यक्रमों से अटल बिहारी वाजपेयी का नाम जुड़ा है।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि अब योजनाएं वोट के हिसाब से नहीं बनाई जा रही है। सबका साथ सबका विकास की भावना से कार्य किया जा रहा था। अठारह हजार गांवों में पहली बार बिजली पहुंचाई गई। गैस सिलेंडर शौचालय गांव गांव पहुंचे।आयुष्मान योजना का लाभ गरीबों को मिल रहा है। पहले लाहौल जैसे क्षेत्रों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया था। नरेंद्र मोदी ने हिमाचल के अपने अनुभव साझा किये। कहा कि पहले यहां पहुंचना कष्टप्रद था।बहुत समय लगता था। अटल टनल के बन जाने से यह कठिनई दूर हो गई। नरेंद्र मोदी ने लाहौल में कहा कि यहां के लोगों को राहत मिली है। छह महीने मार्ग बंद रहते थे। छियालीस किलोमीटर की दूरी कम हो गई।

मोदी ने यहां के चन्द्रमौलि आलू का उल्लेख किया। कहा कि अब इसको बाहर बेचना संभव होगा। यहाँ पैदा होने वाली अनेक जड़ी बूटी का मोदी ने नाम लिया। कहा कि किसानों को इसका लाभ होगा। पर्यटन की यहाँ अपर संभावना है। मोदी ने अनेक पर्यटन स्थलों व बौद्ध केंद्रों का भ नाम लिया। रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। वर्तमान सरकार देश के सभी लोगों तक विकास पहुंचाने का कार्य कर रही है।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here