नवेद शिकोह
उ.प्र. राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की चुनावी गर्मागर्मी में यूपी प्रेस क्लब शाहीबाग़ साबित हो सकता है। संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने लखनऊ के सभी मान्यता प्राप्त पत्रकारों को प्रेस क्लब की सदस्यता दिलाने का एलान किया है। उन्होंने साफ कह दिया है कि यूपी प्रेस क्लब को आजाद कराने के लिए उन्हे प्रदेश के पत्रकारों के साथ प्रेस क्लब परिसर में धरने/अनशन पर बैठना पड़े या ताले तोड़कर वहां का निज़ाम अपने हाथों में लेना पड़े, अब वो संयम नहीं बरत सकते। समिति के अध्यक्ष ने कहा कि उ.प्र.संवाददाता समिति का चुनाव अप्रैल मे होना है, और इससे पहले ही प्रदेश के पत्रकारों के साथ मिलकर वो प्रेस क्लब की आजादी/सदस्यता और चुनाव का लंबित लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे।
पत्रकार नेता हेमंत तिवारी के तेवर देखकर ये लगने लगा है कि वो संवाददाता समिति चुनाव से पहले लखनऊ के करीब आठ सौ पत्रकारों को प्रेस क्लब की सदस्यता दिलवाकर संवाददाता समिति के चुनाव में अध्यक्ष पद की दावेदारी की अपनी राह आसान कर सकते हैं।
यूपी प्रेस क्लब में पत्रकारों को सदस्यता ना दिए जाने का दशकों पुराना विवाद उ.प्र.राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है।
यूपी विधानसभा के प्रेस रूम में संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने पत्रकारों से कहा कि वो सभी मान्यता प्राप्त पत्रकारों को प्रेस क्लब की सदस्यता दिलाने के बाद प्रेस क्लब में चुनाव करवाएंगे। इसके बाद ही संवाददाता समिति के चुनाव की तिथि घोषित होगी।
प्रेस क्लब को आजाद कराने हेतु विधिवत आंदोलन शुरू करने की रूपरेखा घोषित करने के लिए सोमवार को लखनऊ में सैकड़ों पत्रकारों के साथ संवाददाता समिति के अध्यक्ष बैठक करेंगे।
गौरतलब है कि यूपी प्रेस क्लब में लगभग डेढ़ दशक से ज्यादा समय से ना तो पत्रकारो़ को सदस्यता दी जा रही है और ना यहां चुनाव हो रहे हैं। हमेशा से ही प्रेस क्लब में काबिज चंद लोग ये तर्क देते रहे हैं कि यूपी प्रेस क्लब सेंट्रल प्रेस क्लब के अधीन नहीं है। इसलिए यहां का निजाम प्रेस क्लब के संविधान/नियावली के तहत नहीं चलता। ये Upwju / ifwju की सांस्कृतिक इकाई है इसलिए ये यूनियन का अधिकार है कि वो सदस्यता दे या ना दे.. कब चुनाव कराये और कब ना करायें ! जो यूनियन से नहीं जुड़े हैं उन पत्रकारों को यूपी प्रेस क्लब मे दख़ल देने का कोई अधिकार नहीं।
इस तर्क मे अब इसलिए भी दम नहीं रहा क्योंकि ifwju के दो फाड़ होने के कारण इस यूनियन की वैधता के सामने सवालिया निशान लगा है। दूसरी बात ये कि हिंदी बेल्ट की पत्रकारिता के दूसरे सबसे बड़े हब लखनऊ में यूपी के पत्रकारों की सुविधाओं के लिए प्रेस क्लब के नाम पर पर ही सरकारें सहयोग करती रही हैं। जब सभी पत्रकारों के वेलफेयर के लिए यूपी प्रेस क्लब को सरकारों का सहयोग मिलता रहा है तो फिर यूनियन के नाम पर चंद लोग यूपी प्रेस क्लब पर कब्जा जमा कर इसे अपनी मनमानी से क्यों चला रहे है ! इन्हीं बिन्दुओं को लेकर उत्तर प्रदेश में पत्रकारों की सियासत में नरेंद्र मोदी कहे जाने वाले पत्रकार नेता हेमंत तिवारी अब अरविंद केजरीवाल की राह पर चलकर ऐन चुनाव से पहले प्रेस क्लब की सदस्यता दिलाकर पत्रकारों का दिल जीत सकते हैं।
गौरतलब है कि विरोध की आग में तप कर कुंदन सी लोकप्रियता हासिल करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह हेमंत तिवारी की पत्रकार बिरादरी में लोकप्रियता की आंधी विरोध के तिनकों को उड़ाती रही है। यही कारण रहा कि हर बार उनके खिलाफ सारे मोर्चे फेल होते रहे और वो उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के लगभग सभी चुनावों में भारी जनसमर्थन हासिल करते रहे।
संवाददाता समिति के चुनाव नजदीक आते ही उनका रुख बदला-बदला नज़र आ रहा है। लोकप्रियता के अतिआत्मविश्वास से निकल कर वो केजरीवाल की तरह अपने कार्यकाल के बिल्कुल अंतिम समय में मतदाताओं को प्रभावित करने की चाल चलने जा रहे हैं।
पत्रकारों की राजनीति के दिग्गज और संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी अपने खतरों और कमजोरियों को अपनी ताकत बनाने की चाल चलने जा रहे हैं। उनकी निम्न बातें उन्हें कमजोर बना रही हैं-
1- हेमंत तिवारी ने दो वर्ष पहले वादा किया था कि वो लखनऊ के सभी मान्यता प्राप्त पत्रकारों को यूपी प्रेस क्लब की सदस्यता दिलवाये़गे।
2- मान्यता समिति में बतौर अध्यक्ष उन्होंने अपने इस कार्यकाल में लखनऊ के पत्रकारों के हितों के लिए कोई खास काम नहीं किया और आईएफडब्ल्यूजेयू के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दौरों और खीचातानी में ज्यादा समय दिया।
3 – संवाददाता समिति के पिछले चुनावी वादों में उन्होंने वादा किया था कि वो सभी राज्य मुख्यालय के पत्रकारों को यूपी प्रेस क्लब की सदस्यता दिलाने के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। लेकिन सदस्यता को लेकर ना उन्होंने लड़ाई लड़ी और ना ही सदस्यता दिलवा सके।
4- विवादित ifwju के एक धड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. विक्रम राय अपने धुर विरोधी हेमंत तिवारी को आगामी संवाददाता समिति के चुनाव में हराने के लिए बिसात बिछा रहे हैं।
प्रेस क्लब में सदस्यता ना दिये जाने को लेकर लखनऊ के करीब सभी पत्रकार वरिष्ठ पत्रकार नेता के.विक्रम राव और उनके खेमे से नाखुश हैं। इसे उकेर कर एक तीर से अपने तमाम खतरों और कमजोरियों को धराशायी करने के लिए हेमंत तिवारी यूपी प्रेस क्लब के खिलाफ आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। ये आंदोलन हेमंत तिवारी की संवाददाता समिति के आगामी चुनाव में अध्यक्ष पद की दावेदारी का कंपेन भी माना जा रहा है।
किसी भी गुटबाजी और खेमेबंदी से अलग शहर के तमाम पत्रकार हेमंत तिवारी के इस कदम को सियासी पैतरेबाजी बता रहे हैं।
आज प्रेस क्लब की सदस्यता और चुनाव का मुद्दा उठा रहे हेमंत तिवारी कभी इन्हीं अवैध कब्जेदारों के सबसे बड़े खैरख्वाह हुआ करते थे। इन्हीं हेमंत तिवारी ने दस साल से प्रेस क्लब पर काबिज और चुनाव न कराने वालों के लिए लोगों से मोर्चा लिया था।
प्रेस क्लब चाइना बाजार गेट 40 साल से भी पहले पत्रकारों को शैक्षणिक, सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन के लिए दिया गया था। भवन लखनऊ विकास प्राधिकरण का है और लीज यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन नाम की पंजीकृत ट्रेड यूनियन के नाम थी। अब प्रेस क्लब पर उक्त यूनियन नहीं बल्कि एक दूसरी यूपीडब्लूजेयू काबिज है जिसे एलडीए ने अवैध कब्जेदार मानते हुए 72 लाख रुपये किराया जमा करने और भवन तुरंत खाली करने का आदेश दिया है। न तो यूपी प्रेस क्लब और न ही इस पर अवैध रूप से काबिज यूपीडब्लूजेयू कहीं से पंजीकृत हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो फर्जीवाड़े का काम कर रही हैं। एलडीए को न तो 40 साल से किराया दिया न ही अवैध कब्जा छोड़ रहे।
मान्यता समिति अध्यक्ष को प्रेस क्लब से अवैध कब्जा हटवा कर वहां वास्तविक पत्रकारों को काबिज कराना चाहिए।
प्रेस क्लब पत्रकारों के लिए दिया गया था न कि व्यावसायिक गतिविधियों को चलाने के लिए। आज क्लब के अवैध कब्जेदारों ने वहां दो नानवेज की दुकानें किराए पर उठा रखी हैं और हर दो घंटे के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस की 2500₹ की वसूली की जाती है।







