UPPCL बिजली दर प्रस्ताव में सब्सिडी का ब्रेकअप न देकर ग्रामीण व किसानों की दरो में कराना चाहता है बड़ा इजाफा

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  • उत्तर प्रदेश सरकार से मिलने वाली रू. 5500 करोड़ की सब्सिडी पर पावर कार्पोरेशन के गोल मोल जवाब पर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने शुरू की घेराबन्दी आयोग कार्यवाहक अध्यक्ष श्री एस. के. अग्रवाल से की लम्बी बात।
  • आयोग कार्यवाहक अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल का उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को अस्वासन बिजली कम्पनियों को देना होगा सबसिडी का पूरा ब्रेकअप रिपोर्ट की जा रही है तलब।
  • पावर कार्पोरेशन सबसिडी का मद घालमेल कर ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरो में कराना चहता है 350 प्रतिशत वृद्धि

लखनऊ, 7 सितम्बर। प्रदेश के ग्रामीण व कृषि क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 350 प्रतिशत तक की अधिकतम वृद्धि को लेकर जहाॅं पूरे प्रदेश में ग्रामीण व किसानों में भारी रोष है वहीं पावर कारपोरेशन द्वारा उप्र सरकार से मिलने वाली सब्सिडी पर गोलमोल जवाब देने से स्थिति काफी भ्रामक हो गयी है। जिसको लेकर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज नियामक आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल से मुलाकात की और उनके सामने बिन्दुवार यह मुददा उठाया कि उदय के अनुसार बिजली कम्पनियो द्वारा कुल 5500 करोड सब्सिडी सरकार से मिलने की बात की जा रही है। जिसमें 240 करोड किसानों के लिये और 4260 करोड राजस्व सबसिडी बता रही हैं और उसमें 1000 करोड की सब्सिडी इलेक्ट्रिसिटी डयूटी के मद में दिखा रही हैं जो अपने आप में काफी गंभीर मामला हैं क्योंकि सबसिडी का बे्रकअप स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया है कि यह ग्रामीण व कृषि क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर ही पूरी खर्च होगी अथवा नहीं?

नियामक आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को आस्वासन दिया कि हर हाल में बिजली कम्पनियों को सबसिडी का पूरा ब्रेकअप आयोग को उपलब्ध कराना ही होगा पूरी सूचना तलब की जा रही है।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली कम्पनियों द्वारा रू. 4260 करोड की राजस्व सब्सिडी के हेड में दिखा रही है। जब कि वह यह बताने को तैयार नही है कि यह सब्सिडी ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं के लिये है या किसानों के लिये। इसी प्रकार 1000 करोड की इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी किस श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिये है इसका भी कोई ब्रेकअप नही दिया गया है। सवाल यह उठता है कि यदि 5500 करोड़ की सबसिडी उत्तर प्रदेश सरकार किसानों व ग्रामीण को दे रही है तो उसकी दरों में 350 प्रतिसत की वृद्धि का आधार क्या है और इसका खुलासा बिजली कम्पनियाॅं क्यों नही कर रही हैं क्या कम्पनियाॅं अपनी अक्षमता को छिपाने के लिये पिछले दरवाजे से सब्सिडी का उपयोग राजस्व कमी को पूरा करने के लिये करेंगी?

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि बड़ी चालाकी से बिजली कम्पनियों ने उदय अनुबन्ध के तहत सरकार से मिलने वाली सबसीडी जो हमेसा ग्रामीण व किसानों पर ही खर्च होती थी उसका ब्रेकअप न दे कर प्रदेश के ग्रामीण व कृषि क्षेत्र के उपभोक्ताओं के साथ बड़ा अन्याय है। नियमानुसार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 65 के तहत सरकार को रू0 5500 करोड़ की सबसीडी एडवांस में बिजली कम्पनियों को देना चाहिये और उसमें यह प्राविधान होना चाहिये कि यह किस श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं के लिये है।

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