हर तबके के समग्र विकास के लिए है विकासपरक बजट: मुख्यमंत्री

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4 लाख 28 हजार 384 करोड़ 52 लाख रु0 का प्रस्तावित बजट पिछले वित्तीय वर्ष के बजट के सापेक्ष 11.4 प्रतिशत बड़ा

प्रस्तुत बजट में 14 हजार 341 करोड़ 89 लाख रु0 की नई योजनाएं सम्मिलित

 लखनऊ: 16 फरवरी, 2018: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा आज विधान सभा में प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2018-19 का बजट राज्य के समग्र विकास को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह एक विकासपरक बजट है। इस बजट में प्रदेश के किसानों, नौजवानों, महिलाओं, गांवों को ध्यान में रखकर उनको  सक्षम बनाने की योजनाएं सम्मिलित की गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तुत बजट अब तक का सबसे बड़ा बजट है। 04 लाख 28 हजार 384 करोड़ 52 लाख रुपये का प्रस्तावित बजट पिछले वित्तीय वर्ष के बजट के सापेक्ष 11.4 प्रतिशत अधिक है। प्रस्तुत बजट में 14 हजार 341 करोड़ 89 लाख रुपये की नई योजनाएं सम्मिलित की गई हैं।  बजट में राजकोषीय घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत से कम 2.96 प्रतिशत पर सीमित रखा गया है। इसी प्रकार राज्य की ऋणग्रस्तता सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 30 प्रतिशत से कम 29.8 प्रतिशत अनुमानित है।
 प्रस्तुत बजट में वित्तीय अनुशासन पर विशेष बल:
मुख्यमंत्री जी आज यहां विधान भवन स्थित तिलक हाॅल में मीडिया प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रस्तुत बजट में वित्तीय अनुशासन पर विशेष बल देते हुए बुनियादी ढांचे के विकास तथा किसानों के कल्याण पर जोर दिया गया है। प्रदेश में लगभग पौने दो करोड़ परिवारों के पास विद्युत कनेक्शन नहीं है। बजट में ऊर्जा क्षेत्र की परियोजनाओं के 29 हजार 883 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है। यह विगत वर्ष के बजट में प्राविधानित धनराशि से लगभग 54 प्रतिशत अधिक है।
बजट में बुनियादी ढांचे के विकास तथा किसानों के कल्याण पर जोर:
उन्होंने कहा कि अच्छी सड़कें आधुनिक समय की आवश्यकता हैं। प्रदेशवासियों को बेहतर सड़कें, कनेक्टिविटी मिले, इस हेतु जिला मुख्यालयों को फोरलेन से जोड़ने, चैड़ी सड़कांे का निर्माण, ग्रामीण सड़कों के निर्माण हेतु लोक निर्माण विभाग के बजट में 22 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है। इसी प्रकार सिंचाई परियोजनाओं, जल निकासी, बाढ़ नियंत्रण आदि के लिए प्रस्तावित बजट में विगत वर्ष के सापेक्ष 54 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है। उन्होंने बताया कि सिंचाई परियोजनाओं यथा मध्य गंगा नहर परियोजना, सरयू नहर परियोजना, बाढ़ सागर परियोजना, कनहर परियोजना आदि के पूरा हो जाने पर एक लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त भूमि को सिंचाई की सुविधा मिल जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश खाद्यान्न, गन्ना, डेयरी उत्पाद आदि में देश में प्रथम स्थान पर है। यहां पशुधन, बागवानी आदि में विकास की सम्भावनाओं के मद्देनजर विगत वर्ष के बजट के सापेक्ष प्रस्तुत बजट में 17.5 प्रतिशत अधिक धनराशि प्रस्तावित है। इसी प्रकार ग्राम्य विकास के तहत गांवों में बेहतर कनेक्टिविटी तथा पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विगत वर्ष के बजट से 28 प्रतिशत अधिक धनराशि प्रस्तावित की गई है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्तर पर पंचायती व्यवस्था के सुचारु संचालन की आवश्यकता है। पंचायतीराज विभाग पर प्रदेश को खुले में शौच मुक्त करने की जिम्मेदारी है। इस विभाग के लिए प्रस्तावित धनराशि में विगत वर्ष के बजट की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक की वृद्धि की गई है।
योगी ने कहा कि प्रस्तुत बजट में शिक्षा और चिकित्सा कि लिए विशेष प्राविधान किये गये हैं। इस वर्ष शिक्षा हेतु सर्वाधिक धनराशि का प्राविधान किया गया है। बेसिक, माध्यमिक, उच्च एवं प्राविधिक शिक्षा विभाग हेतु सम्मिलित रूप से 68263.20 करोड़ रुपये की धनराशि प्रस्तावित है। नगर विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन हेतु 14654.22 करोड़ रुपये की धनराशि का प्राविधान प्रस्तावित है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग हेतु विगत वर्ष के बजट के सापेक्ष 17.3 प्रतिशत अधिक और महिला तथा बाल विकास हेतु विगत वर्ष के बजट के सापेक्ष 15 प्रतिशत अधिक धनराशि प्रस्तावित की गई है।
स्टार्टअप योजना तथा ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के लिए 250-250 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित:
मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय 2018-19 के प्रस्तावित बजट में किए गए नवीनतम प्राविधानों के अन्तर्गत स्टार्टअप योजना तथा ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के लिए 250-250 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत 100 करोड़ रुपये, समस्त शासकीय कार्यालयों में ई-आॅफिस व्यवस्था लागू करने के लिए 30 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। उन्हांेने बताया कि प्रदेश में मेट्रो रेल परियोजनाओं के लिए 500 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। कानपुर, आगरा, मेरठ शहर में नई परियोजनाओं पर काम शुरू किया जाना है। वाराणसी, गोरखपुर, इलाहाबाद व झांसी में मेट्रो रेल परियोजनाओं के लिए डी0पी0आर0 तैयार भारत सरकार को भेजा गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 11500 करोड़ रु0 की व्यवस्था प्रस्तावित: 
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए वर्ष 2018-19 के बजट में 11500 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसी प्रकार स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) 5000 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय पेयजल कार्यक्रम के लिए 1500 करोड रुपये तथा राज्य पेयजल कार्यक्रम के लिए 120 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। प्रदेश के मुसहर समुदाय, वनटांगिया गांवों के निवासियों, जो शासन की योजनाओं से वंचित रहे हैं, को चिन्हित कर मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत, आवास मुहैया कराने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्राविधान प्रस्तावित है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए प्रस्तावित बजट में 2217 करोड़ रु0 की व्यवस्था: 
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए प्रस्तावित बजट में 2217 करोड़ रुपये, लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी इलाहाबाद, अलीगढ़, झांसी, मुरादाबाद, बरेली तथा सहारनपुर हेतु स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत 1650 करोड़ रुपये, अमृत योजना के तहत प्रदेश के शहरों में पेयजल, पार्काें आदि की सुविधा के विकास के लिए 2200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि निराश्रित पशुओं को आश्रय मुहैया कराकर किसानों को नुकसान से बचाने के लिए कान्हा गोशाला एवं बेसहारा पशु आश्रय योजना हेतु प्रस्तुत बजट में 98 करोड़ 50 लाख रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों एवं राजकीय मेडिकल काॅलेजों के लिए पर्याप्त मात्रा में धनराशि की व्यवस्था प्रस्तावित है। प्रदेश के पांच जनपदों के जिला चिकित्सालयों को उच्चीकृत कर मेडिकल काॅलेज के रूप में पूर्ण करने के लिए 500 करोड़ रुपये तथा राजकीय मेडिकल काॅलेज कानपुर, गोरखपुर, आगरा और इलाहाबाद के बर्न यूनिट की स्थापना के लिए 14 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए भी धनराशि की व्यवस्था प्रस्तावित है।

पर्यटन को बढ़ावा:

उन्होंने कहा कि कुम्भ-2019 के आयोजन हेतु 1500 करोड़ रुपये की व्यवस्था है। ब्रज परिक्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ब्रज तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अन्तर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले सभी वर्गाें के परिवारों की पुत्रियों के विवाह के लिए 250 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। छात्रवृत्ति योजनाओं के अन्तर्गत सामान्य, अति पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था प्रस्तुत बजट में प्रस्तावित है।
योगी ने कहा कि प्रस्तुत बजट हर तबके के समग्र विकास के लिए बनाया गया है। एक विकासपरक और उत्कृष्ट बजट के लिए वित्त मंत्री श्री राजेश अग्रवाल एवं प्रमुख सचिव वित्त श्री संजीव मित्तल की सराहना करते हुए उन्होंने भरोसा जताया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के प्रस्तुत बजट से प्रदेश में विकास की गति बढ़ेगी और प्रदेश एक विकसित और समृद्ध राज्य के रूप में सामने आएगा।
इस अवसर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, वित्त राज्यमंत्री श्रीमती अनुपमा जायसवाल, सूचना राज्य मंत्री डाॅ. नीलकण्ठ तिवारी, प्रमुख सचिव नियोजन संजीव सरन, प्रमुख सचिव सूचना अवनीश कुमार अवस्थी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।