कोर्ट ने छह माह में जांच पूरी करने और 26 को रिपोर्ट पेश करने को कहा
लखनऊ, 03 नवंबर 2018: सरकार के गले की फ़ांस बनी बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षक के 68,500 पदों के लिए हुई भर्ती की अब सीबीआई जांच होगी, इस जांच के आदेश हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दिया है। जोकि सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जांच कमिटी सिर्फ संलिप्त अफसरों को बचाने के लिए बनाई गई थी। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। सरकार सीबीआई जांच के लिए तैयार नहीं है, इसलिए हमें आदेश देना पड़ रहा है। कोर्ट ने सीबीआई को 6 महीने में जांच पूरी करने और इससे पहले 26 नवंबर को प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
कोर्ट ने कहा कि जांच में किसी अधिकारी की संलिप्तता आती हो तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। जस्टिस इरशाद अली की बेंच ने भर्ती से जुड़ी दर्जनों याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों को स्क्रूटनी में रखा गया था, उनके भी चयन पर अब तक निर्णय नहीं लिया गया। सरकार की जांच कमिटी में दो सदस्य बेसिक शिक्षा विभाग के ही हैं, जबकि उसी विभाग के अधिकारी जांच के दायरे में हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षक के 68,500 पदों पर भर्ती के लिए 27 मई को लिखित परीक्षा हुई थी। इसमें 1.07 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। 13 अगस्त को रिजल्ट घोषित हुआ तो उसमें 41,556 अभ्यर्थी ही पास हुआ।
कई अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन पर सवाल उठाते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसी बीच 5 सितंबर को 38 हजार से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांट दिए गए। सरकार ने कुछ अफसरों के खिलाफ कार्रवाई भी की, लेकिन कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ। हाई कोर्ट ने कहा कि पिछले 20 साल से राज्य सरकार चयन बोर्ड या कमिशन की हर भर्ती में गड़बड़ी देखने को मिल रही। लेकिन दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय जांच कमिटियां बनती रहीं, जिन्होंने कुछ नहीं किया।’
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दूसरी ओर बेसिक शिक्षा अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार ने कहा सहायक शिक्षक भर्ती मामले की जांच में कोई आपराधिक आशय सामने नहीं आया था। सरकार दोनों ही भर्तियों में कोर्ट के फैसले के खिलाफ डबल बेंच में अपील करेगी। नियुक्तिपत्र पा चुके अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा की जाएगी।







